Thursday, January 16, 2025

Alcoholism ED Problem: Best Sexologist Patna, Bihar | Dr. Sunil Dubey

 नमस्कार दोस्तों, दुबे क्लिनिक आप सभी लोगों का स्वागत करता है। जैसा कि आप सभी जानते है कि आज के समय में गुप्त व यौन रोगियों की संख्या न केवल भारत बल्कि दुनिआ के सभी कोने में बढ़ता जा रहा है। आज का यह सत्र, इरेक्टाइल डिसफंक्शन जिसे नपुंसकता का एक रूप माना जाता है उसी से सम्बंधित है। मूल रूप से, यह पुरुषो में होने वाला एक शारीरिक यौन समस्या है जिसमे पुरुषो को स्तंभन दोष का सामना करना पड़ता है। वे अपने पेनिले के स्तंभन को लेकर अपने यौन क्रिया के लिए संघर्ष करते है। वैसे तो इस गुप्त व यौन समस्या के बहुत सारे कारक है परन्तु अत्यधिक शराब का सेवन इस समस्या के लिए एक सामान्य कारक है। आज हम जानेगे कि अधिक शराब पीने वाले को यह इरेक्टाइल डिसफंक्शन (ईडी) कैसे प्रभावित करता है और आयुर्वेदिक चिकित्सा व उपचार के माध्यम से इस समस्या को कैसे स्थायी रूप से ठीक कर सकते है।

 

अधिक शराब के सेवन से इरेक्टाइल डिसफंक्शन (ईडी) होता है। 

भारत के बहुत सारे लोग यह जानना चाहते हैं कि क्या अत्यधिक शराब पीने से पुरुषों में इरेक्टाइल डिसफंक्शन होता है। उनकी जानकारी के लिए, उन्हें यह पता होना चाहिए कि हाँ, शराब की लत (अत्यधिक शराब के सेवन) पुरुषों में इरेक्टाइल डिसफंक्शन का कारण बन सकती है। चुकी, यह शरीर में तंत्रिका कार्य को नुकसान पहुंचा सकता है, जिससे इरेक्शन को मजबूती से प्राप्त करने और इसको बनाए रखने की क्षमता में कमी हो सकती है।

विश्व प्रसिद्ध आयुर्वेदाचार्य डॉ. सुनील दुबे जो कि पटना के सर्वश्रेष्ठसेक्सोलॉजिस्ट डॉक्टर है, कहते हैं कि लंबे समय तक शराब का अत्यधिक सेवन तंत्रिका कार्य को नुकसान पहुंचा सकता है, जिससे व्यक्ति को इरेक्टाइल डिसफंक्शन का स्थायी रूप से होना आम बात है। आम तौर पर, अत्यधिक शराब के सेवन से होने वाली तंत्रिका क्षति को अल्कोहलिक न्यूरोपैथी के रूप में भी जाना जाता है। यह अल्कोहलिक न्यूरोपैथी इसलिए होती है क्योंकि लगातार शराब पीने से शरीर में विटामिन बी की कमी हो जाती है और यह समस्या उत्पन्न हो जाती है।

 

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शराब व्यक्ति के स्तंभन को कैसे प्रभावित करती है:

भारत के सीनियर क्लीनिकल सेक्सोलॉजिस्ट डॉक्टर डॉ. सुनील दुबे का कहना है कि सबसे पहले हमें व्यक्ति में होने वाले इरेक्शन प्रक्रिया को समझना होगा जो कि उसके स्तंभन के लिए एक जटिल स्थिति है और इसमें निम्नलिखित कारक शामिल होते हैं: -

·         मस्तिष्क: मस्तिष्क वह अंग है जो विचार, स्मृति और गति सहित शरीर के सभी कार्यों को नियंत्रित करता है। यह मानव शरीर का सबसे जटिल अंग है और अरबों तंत्रिका कोशिकाओं से बना है।

·         हार्मोन: हार्मोन के प्रकार के रसायन होते हैं जो व्यक्ति के शरीर में रक्त के माध्यम से आपके अंगों, त्वचा, मांसपेशियों और अन्य ऊतकों तक संदेश पहुँचाकर आपके शरीर में विभिन्न कार्यों का समन्वय करते हैं। ये संकेत आपके शरीर को बताते हैं कि क्या करना है और कब करना है। हार्मोन जीवन और व्यक्ति के स्वास्थ्य के लिए आवश्यक तत्व हैं।

·         रक्त वाहिकाएँ: रक्त वाहिकाएँ नलिकाएँ होती हैं जो पूरे शरीर में रक्त ले जाती हैं, ऊतकों और अंगों तक ऑक्सीजन और पोषक तत्व पहुँचाती हैं। वे हृदय और रक्त के साथ संचार प्रणाली का हिस्सा हैं।

·         तंत्रिकाएँ: नसें तंत्रिका तंतुओं के बंडल होते हैं जो मस्तिष्क और शरीर के बीच विद्युत और रासायनिक संकेतों को ले जाते हैं। वे मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी के साथ तंत्रिका तंत्र की नींव हैं।

 

जैसा कि हम सभी जानते है कि इरेक्टाइल डिसफंक्शन यौन क्रियाकलाप के लिए पर्याप्त रूप से दृढ़ इरेक्शन प्राप्त करने या बनाए रखने में असमर्थता की एक स्थिति है। शराब का अत्यधिक सेवन शरीर के इन सभी अंगों को प्रभावित करता है और इरेक्टाइल डिसफंक्शन के विकास में योगदान दे सकता है। उदाहरण के लिए, यदि कोई पुरुष एक ही शाम में अत्यधिक मात्रा में शराब पीता है, तो इससे उनके शरीर में ऐसे परिवर्तन हो सकते हैं जो इरेक्शन प्राप्त करना अधिक कठिन बना देते हैं। शरीर में कई तरह के परिवर्तन हो सकते हैं जैसे-

  1. ·         तंत्रिका तंत्र
  2. ·         हार्मोन का स्तर
  3. ·         रक्त परिसंचरण

किसी भी व्यक्ति में लंबे समय तक अत्यधिक शराब का सेवन रक्त वाहिकाओं और नसों को स्थायी नुकसान पहुंचा सकता है। जैसा कि हम सभी जानते हैं कि इरेक्शन प्राप्त करना एक जटिल प्रक्रिया है, और अगर शरीर में किसी भी चरण के दौरान कोई भी समस्या होती है तो उन्हें इरेक्टाइल डिस्फंक्शन हो सकता है। शरीर में यौन विचार और उत्तेजना तंत्रिका तंत्र को सक्रिय करती है और पेनिले में तंत्रिका से न्यूरोट्रांसमीटर जारी करती है। ये न्यूरोट्रांसमीटर पेनिले की धमनियों में मांसपेशियों को आराम देते हैं, जिससे रक्त प्रवाह में कई गुना वृद्धि होती है।

 

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अत्यधिक शराब के सेवन से होने वाले इरेक्टाइल डिसफंक्शन के तंत्र को समझना:

अत्यधिक शराब का सेवन विभिन्न मनोवैज्ञानिक कारकों या तंत्रों के माध्यम से इरेक्टाइल डिसफंक्शन में योगदान दे सकता है। कुछ प्रमुख ऐसे कारक हैं जो शराब के सेवन और इरेक्टाइल डिसफंक्शन के बीच संबंध को स्पष्ट करते हैं।

 

तंत्रिका संबंधी प्रभाव:

शराब व्यक्ति में केंद्रीय तंत्रिका तंत्र अवसादक के रूप में कार्य करती है। यह यौन उत्तेजना और उसकी प्रतिक्रिया में शामिल तंत्रिका संकेतों के संचरण में बाधा उत्पन्न कर सकती है। तंत्रिका तंत्र में यह व्यवधान व्यक्ति के उसके पेनिले के निर्माण और उसे बनाए रखने की क्षमता को क्षीण कर सकता है।

 

संवहनी प्रभाव:

अत्यधिक शराब के सेवन से व्यक्ति के शरीर में रक्त परिसंचरण पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है। यह वासोडिलेशन (रक्त वाहिकाओं का चौड़ा होना) का कारण बन सकती है, जिसके परिणामस्वरूप उनके पेनिले में रक्त का प्रवाह कम हो जाता है। स्तंभन प्रक्रिया के लिए पर्याप्त रक्त प्रवाह महत्वपूर्ण है, और इस संबंध में कोई भी कमी स्तंभन दोष में योगदान कर सकती है।

 

हार्मोनल असंतुलन:

व्यक्ति का शराब का लगातार सेवन उसके शरीर में हार्मोनल संतुलन को बिगाड़ सकता है। इससे उनमे एस्ट्रोजन का स्तर बढ़ सकता है और टेस्टोस्टेरोन का स्तर कम हो सकता है। टेस्टोस्टेरोन यौन क्रिया को बनाए रखने के लिए आवश्यक है, और इसका कम स्तर पुरुषों में स्तंभन समस्याओं में योगदान कर सकता है।

 

लिवर डिसफंक्शन:

अत्यधिक शराब के सेवन से व्यक्ति का उसके लीवर को नुकसान हो सकता है, जिससे सिरोसिस नामक स्थिति उत्पन्न हो सकती है। लिवर की शिथिलता हार्मोन चयापचय को प्रभावित कर सकती है और हार्मोनल असंतुलन में योगदान दे सकती है, जिससे इरेक्टाइल डिसफंक्शन का जोखिम और बढ़ जाता है।

 

मनोवैज्ञानिक कारक:

जैसा कि हम सभी जानते है कि शराब मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है, जिससे व्यक्ति में अवसाद और चिंता जैसी स्थितियाँ पैदा हो सकती हैं। मनोवैज्ञानिक कारक यौन क्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ इरेक्टाइल डिसफंक्शन में योगदान दे सकती हैं।

 

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एंडोथेलियल डिसफंक्शन:

व्यक्ति में उसके शराब का अत्यधिक सेवन एंडोथेलियल डिसफंक्शन का कारण भी बन सकता है, जो रक्त वाहिकाओं की आंतरिक परत को प्रभावित करता है। यह शिथिलता रक्त वाहिकाओं के ठीक से फैलने और सिकुड़ने की क्षमता को प्रभावित कर सकती है, जिससे रक्त प्रवाह प्रभावित होता है और इरेक्टाइल डिसफंक्शन (स्तंभन दोष) में योगदान देता है।

 

ऑक्सीडेटिव तनाव बढ़ाएँ:

व्यक्ति में अत्यधिक शराब का सेवन उसके शरीर में ऑक्सीडेटिव तनाव बढ़ा सकता है। बार-बार और अत्यधिक शराब का सेवन शरीर के प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट रक्षा तंत्र को प्रभावित कर सकता है, जो मुक्त कणों को बेअसर करने और सेलुलर स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए जिम्मेदार होते हैं। समय के साथ, लगातार ऑक्सीडेटिव तनाव कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़ा हुआ है, जिसमें यकृत रोग (जैसे शराबी यकृत रोग), हृदय संबंधी समस्याएं, न्यूरोडीजेनेरेटिव विकार और कुछ कैंसर का जोखिम व खतरा का बढ़ जाना शामिल है।

 

नाइट्रिक ऑक्साइड के स्तर में कमी:

अत्यधिक शराब के सेवन से व्यक्ति के शरीर में नाइट्रिक ऑक्साइड (NO) के स्तर में कमी होती हुई देखी गई है। नाइट्रिक ऑक्साइड एक महत्वपूर्ण संकेतन अणु है जो वासोडिलेशन, रक्त वाहिकाओं के शिथिलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह यौन उत्तेजना के दौरान पेनिले में रक्त प्रवाह सहित रक्त प्रवाह को विनियमित करने में मदद करता है।

 

कामेच्छा में कमी:

अत्यधिक शराब का सेवन व्यक्ति को कई कारणों से कामेच्छा (यौन इच्छा) में कमी ला सकता है। जबकि मध्यम शराब का सेवन जरूरी नहीं कि यौन क्रिया पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाले, अत्यधिक या लगातार शराब का सेवन कई शारीरिक और मनोवैज्ञानिक कारकों का परिणाम हो सकता है जो कामेच्छा में कमी लाने में अधिक योगदान करते हैं।

 

प्रदर्शन चिंता:

व्यक्ति में अधिक शराब के सेवन से आराम की भावना और कम अवरोध पैदा हो सकता है, लेकिन यह प्रदर्शन चिंता और यौन रोग में भी योगदान दे सकता है। अच्छा प्रदर्शन न कर पाने का डर या इरेक्टाइल डिसफंक्शन की चिंता कामेच्छा को कम कर सकती है।

 

निर्जलीकरण:

शराब एक मूत्रवर्धक है और इसका अत्यधिक सेवन शरीर में निर्जलीकरण का कारण बन सकता है। निर्जलीकरण से व्यक्ति के शरीर में थकान और ऊर्जा की कमी हो सकती है, जो समग्र स्वास्थ्य और कामेच्छा को प्रभावित करता है।

 

रिश्तों से जुड़ी समस्याएँ:

वैसे तो हम सभी जानते है कि शराब का सेवन वैवाहिक व रिश्तों में समस्याएँ पैदा कर सकता है, और रिश्तों में तनाव या संघर्ष यौन इच्छा को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकता है।

 


तंत्रिका कार्य:

व्यक्ति का उसके शराब का अत्यधिक सेवन तंत्रिका कार्य को नुकसान पहुँचा सकता है, जिससे ठीक से इरेक्शन प्राप्त करने की क्षमता कम हो सकती है।

 

रक्त परिसंचरण:

शराब व्यक्ति को उसके शरीर में रक्त परिसंचरण को प्रभावित कर सकती है, जिससे उसे इरेक्शन प्राप्त करना मुश्किल हो सकता है।

 

वृषण कार्य और हार्मोन उत्पादन:

शराब व्यक्ति को उसके वृषण कार्य और हार्मोन उत्पादन को प्रभावित कर सकती है, जिससे उसकी यौन इच्छा में कमी हो सकती है और इरेक्शन कम हो सकता है।

 

केंद्रीय तंत्रिका तंत्र:

अत्यधिक शराब के सेवन से व्यक्ति को उसके केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को दबा सकती है, जिससे उसकी यौन उत्तेजना कम हो सकती है और इरेक्शन प्राप्त करने की क्षमता कम हो सकती है।

 

हम सभी को यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि शराब के सेवन की मात्रा और अवधि के आधार पर स्तंभन कार्य पर प्रभाव की गंभीरता अलग-अलग हो सकती है। जबकि मध्यम शराब का सेवन जरूरी नहीं कि स्तंभन दोष का कारण बने, अत्यधिक और लंबे समय तक उपयोग जोखिम को काफी हद तक बढ़ा सकता है। शराब के सेवन के कारण लगातार स्तंभन समस्याओं का सामना करने वाले व्यक्तियों को उचित मूल्यांकन और मार्गदर्शन के लिए चिकित्सा व उपचार के लिए सलाह लेनी चाहिए।

 

क्या शराब से प्रेरित इरेक्टाइल डिसफंक्शन को ठीक किया जा सकता है?

कई मामलों में, शराब से प्रेरित इरेक्टाइल डिसफंक्शन (ईडी) को ठीक किया जा सकता है। इरेक्टाइल डिसफंक्शन से तात्पर्य संतोषजनक यौन प्रदर्शन के लिए पर्याप्त इरेक्शन प्राप्त करने या बनाए रखने में लगातार असमर्थता से सम्बंधित होता है। अत्यधिक शराब का सेवन अस्थायी इरेक्टाइल डिसफंक्शन का एक सामान्य कारण भी माना जाता है।

 

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जब कोई पुरुष शराब से प्रेरित इरेक्टाइल डिसफंक्शन का अनुभव करता है, तो उसके शराब का सेवन कम करने या खत्म करने से अक्सर इरेक्टाइल फंक्शन (स्तंभन कार्य) में सुधार हो सकता है। प्रतिवर्तीता की सीमा कई कारकों पर निर्भर करती है, जिसमें शराब के उपयोग की गंभीरता और अवधि, व्यक्तिगत स्वास्थ्य और कोई अंतर्निहित चिकित्सा स्थिति भी शामिल होती है।

 

यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि व्यक्तिगत प्रतिक्रियाएँ अलग-अलग होती हैं, और कुछ लोगों को दूसरों की तुलना में तेज़ी से ठीक होने का अनुभव हो सकता है। इसके अतिरिक्त, लंबे समय तक या बार-बार शराब का सेवन अधिक लगातार और गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है। व्यापक मूल्यांकन और अनुरूप उपचार योजना के लिए पेशेवर मार्गदर्शन लेना महत्वपूर्ण है।

 

अत्यधिक शराब के सेवन के कारण इरेक्टाइल डिसफंक्शन से पीड़ित रोगियों का मूल्यांकन:

विश्व-प्रसिद्ध आयुर्वेदाचार्य डॉ सुनील दुबे जो बिहार के सर्वश्रेष्ठसेक्सोलॉजिस्ट डॉक्टर भी है, बताते है कि अत्यधिक शराब के सेवन के कारण इरेक्टाइल डिसफंक्शन से पीड़ित रोगियों का मूल्यांकन करना महत्वपूर्ण होता है। वे कहते है कि अत्यधिक शराब के सेवन के कारण इरेक्टाइल डिसफंक्शन (ईडी) से पीड़ित रोगियों के मूल्यांकन में अंतर्निहित कारणों को समझने और उचित उपचार रणनीतियों को निर्धारित करने के लिए एक व्यापक दृष्टिकोण शामिल है। ऐसे रोगियों के मूल्यांकन में मुख्य चरण निम्न प्रकार के होते हैं: -

 

यौन रोग (स्तंभन दोष) का मेडिकल का इतिहास:

सबसे पहले, शराब के सेवन का विस्तृत इतिहास प्राप्त करना, जिसमें इसकी मात्रा और अवधि शामिल है। इरेक्टाइल डिसफंक्शन के लक्षणों की शुरुआत और प्रगति के बारे में पूछताछ व जानकारी प्राप्त करना। मधुमेह, हृदय रोग या तंत्रिका संबंधी विकारों जैसी किसी भी सहवर्ती चिकित्सा स्थिति का आकलन करना, जो इरेक्टाइल डिसफंक्शन में योगदान कर सकती हैं।

 

जीवनशैली और मनोसामाजिक मूल्यांकन:

·         व्यक्ति को उसके आहार, व्यायाम और तनाव के स्तर सहित रोगी की समग्र जीवनशैली का मूल्यांकन करना।

·         उसके अवसाद, चिंता या रिश्ते की समस्याओं जैसे ईडी में योगदान देने वाले किसी भी मनोवैज्ञानिक कारक का आकलन करना।

·         गुप्त व यौन रोगी के मानसिक स्वास्थ्य पर शराब के प्रभाव का पता लगाना कि यह किस हद तक उन्हें प्रभावित करती है।

 

शारीरिक परीक्षण:

·         हृदय स्वास्थ्य, तंत्रिका संबंधी कार्य और अंतःस्रावी स्थिति के आकलन सहित संपूर्ण शारीरिक परीक्षण करना।

·         यकृत की शिथिलता या शराब से संबंधित अन्य जटिलताओं के लक्षणों का मूल्यांकन करना।

 

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प्रयोगशाला परीक्षण:

·         टेस्टोस्टेरोन सहित हार्मोन के स्तर का आकलन करने के लिए रक्त परीक्षण करना।

·         यकृत कार्य और समग्र स्वास्थ्य के मार्करों की जाँच करना।

·         हृदय संबंधी जोखिम का आकलन करने के लिए लिपिड प्रोफ़ाइल और रक्त शर्करा परीक्षण करना।

 

इमेजिंग (अल्ट्रासाउंड) अध्ययन:

कुछ मामलों में, पेनिले में रक्त प्रवाह का मूल्यांकन करने के लिए डॉपलर अल्ट्रासाउंड जैसे इमेजिंग अध्ययन किए जा सकते हैं।

 

शराब के उपयोग की जांच करना:

·         शराब के सेवन के पैटर्न का आकलन करने और संभावित शराब के उपयोग विकारों की पहचान करने के लिए मानकीकृत उपकरणों का उपयोग करना।

·         यदि आवश्यक हो तो व्यसन विशेषज्ञों या परामर्शदाताओं के साथ सहयोग प्राप्त करना

 

हृदय संबंधी मूल्यांकन:

शराब के सेवन और हृदय संबंधी समस्याओं के बीच संबंध को देखते हुए, किसी भी योगदान कारक की पहचान करने के लिए हृदय संबंधी स्वास्थ्य मूल्यांकन की जाँच करना।

 

मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन:

स्तंभन दोष में योगदान देने वाले किसी भी मनोवैज्ञानिक कारक का आकलन करने और उसका समाधान करने के लिए एक मानसिक स्वास्थ्य पेशेवर की सहायता लेने पर विचार करना।

 

गुप्त व यौन रोगी को शिक्षित करना:

·         रोगी को यौन क्रिया और समग्र स्वास्थ्य पर अत्यधिक शराब के सेवन के प्रभावों के बारे में शिक्षित करना।

·         शराब का सेवन कम करने सहित जीवनशैली में बदलाव के बारे में जानकारी प्रदान करना।

 

उपचार योजना:

·         ईडी और अंतर्निहित कारणों दोनों को संबोधित करते हुए एक व्यापक उपचार की योजना विकसित करना।

·         जीवनशैली में बदलाव, परामर्श और, यदि आवश्यक हो, तो ईडी के लिए आयुर्वेदिक चिकित्सा उपचार पर विचार करना।

·         शराब छोड़ने की रणनीतियों के लिए व्यसन विशेषज्ञों के साथ सहयोग लेना।

 

अनुवर्ती करना:

·         प्रगति की निगरानी करने और आवश्यकतानुसार उपचार योजना को समायोजित करने के लिए नियमित अनुवर्ती नियुक्तियों को शेड्यूल करना।

·         शराब छोड़ने और समग्र स्वास्थ्य सुधार के लिए निरंतर समर्थन को प्रोत्साहित करना।

 

व्यक्ति को समस्या का मूल्यांकन उसके संवेदनशीलता के साथ करना और रोगी के साथ खुला संचार सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण होता है। मूत्र रोग विशेषज्ञों, गुप्त व यौन रोग विशेषज्ञ, प्राथमिक देखभाल चिकित्सकों, मानसिक स्वास्थ्य पेशेवरों और व्यसन विशेषज्ञों को शामिल करने वाली सहयोगी देखभाल अत्यधिक शराब के सेवन के कारण होने वाले स्तंभन दोष के प्रबंधन के लिए एक समग्र दृष्टिकोण प्रदान कर सकती है।

 

अत्यधिक शराब के सेवन के कारण इरेक्टाइल डिसफंक्शन से पीड़ित रोगियों का उपचार:

अत्यधिक शराब के सेवन के कारण होने वाले इरेक्टाइल डिसफंक्शन (ईडी) के उपचार में शराब से संबंधित समस्याओं और स्तंभन दोष (ईडी) दोनों को संबोधित करना शामिल होता है। यहाँ एक व्यापक दृष्टिकोण दिया जा रहा है, जो निम्नलिखित है: -

शराब की लत का उपचार:

·         सबसे पहला और महत्वपूर्ण कदम रोगी को शराब पीना बंद करने या काफी कम करने के लिए प्रोत्साहित करना स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना है।

·         यदि आवश्यक हो तो व्यसन परामर्श या सहायता समूहों के लिए संसाधन प्रदान करना

·         अंतर्निहित शराब उपयोग विकार को संबोधित करने के लिए व्यसन विशेषज्ञों के साथ सहयोग करना

 

जीवनशैली में बदलाव:

·         समग्र हृदय स्वास्थ्य में सुधार के लिए नियमित रूप से व्यायाम और संतुलित आहार के साथ एक स्वस्थ जीवन शैली को बढ़ावा देना।

·         तनाव प्रबंधन तकनीकों को प्रोत्साहित करना, क्योंकि तनाव शराब के सेवन और ईडी दोनों में योगदान कर सकता है।

मनोवैज्ञानिक परामर्श:

·         परामर्श या चिकित्सा के माध्यम से ईडी में योगदान देने वाले किसी भी मनोवैज्ञानिक कारक को संबोधित करना जो इससे सम्बंधित है।

·         चिंता, अवसाद या यौन क्रियाशीलता को प्रभावित करने वाले संबंध मुद्दों के लिए सहायता प्रदान करना।

 

इरेक्टाइल डिसफंक्शन (स्तंभन दोष) के लिए आयुर्वेदिक दवाएं:

·         इरेक्टाइल फंक्शन को बेहतर बनाने में मदद के लिए आयुर्वेदिक चिकित्सा व उपचार और चिंता अवरोधक को निर्धारित करने पर विचार करना।

·         ये प्राकृतिक दवाएँ नाइट्रिक ऑक्साइड के प्रभाव को बढ़ाती हैं, जो शरीर में एक प्राकृतिक रसायन है जो पेनिले में मांसपेशियों को आराम देता है, जिससे रक्त प्रवाह में वृद्धि होती है। आयुर्वेदा प्राकृतिक रूप से गुप्त व यौन समस्याओं के निदान में महत्वपूर्ण कारक है।

 

सहयोगी देखभाल:

व्यापक देखभाल सुनिश्चित करने के लिए मूत्र रोग विशेषज्ञों, व्यसन विशेषज्ञों, मानसिक स्वास्थ्य पेशेवरों, गुप्त व यौन रोग विशेषज्ञों, और अन्य स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के साथ मिलकर काम करना; रोगियों के लिया बहुत ही महत्वपूर्ण होता है।

 

गुप्त व यौन रोगी की व्यक्तिगत आवश्यकताओं और प्राथमिकताओं के अनुसार उपचार योजना को सही रूप से तैयार करना महत्वपूर्ण होता है। इसके अतिरिक्त, ईडी के मनोवैज्ञानिक पहलुओं को संबोधित करना और शराब से परहेज़ के लिए निरंतर सहायता प्रदान करना समग्र प्रबंधन रणनीति के महत्वपूर्ण घटक हैं। प्रगति की निगरानी करने और आवश्यकतानुसार समायोजन करने के लिए नियमित संचार और अनुवर्ती आवश्यक हैं।

 

अधिक जानकारी के लिए:

दुबे क्लिनिक

भारत का प्रमाणित आयुर्वेद और सेक्सोलॉजी क्लिनिक

डॉ. सुनील दुबे, गोल्ड मेडलिस्ट सेक्सोलॉजिस्ट

बी..एम.एस. (रांची), एम.आर.एस.एच. (लंदन), आयुर्वेद में पीएचडी (यूएसए)

क्लिनिक का समय: 08:00 AM-08:00 PM

!!!हेल्पलाइन नंबर: +91 98350-92586!!!

वेन्यू: दुबे मार्केट, लंगर टोली, चौराहा, पटना-04

Monday, January 13, 2025

Best Sexologist Patna Bihar Low Libido Treatment | Dr. Sunil Dubey

 हेलो फ्रेंड्स आप सभी का दुबे क्लिनिक में स्वागत है। वर्त्तमान समय में, जैसा कि हम सभी देख रहे हैं कि भारत के हर कोने में गुप्त व यौन रोगियों की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है। दरअसल, गुप्त व यौन रोगियों के संख्या में बढ़ोतरी के कई कारण हैं। हम जानते है कि पश्चिमी देशो की तुलना में भारत में यौन शिक्षा का कोई प्रावधान नहीं है, जिसके कारण भारत के अधिकांश लोग अपने-अपने गुप्त व यौन समस्याओं को किसी से भी साझा करने में झिझकते हैं। लोगो से अपने समस्या के साझा न करने के पीछे उनकी मानसिकता व सामाजिक सोच महत्वपूर्ण कारक है। ऐसा कहा जाता है कि हम जैसा सोचते हैं, वैसे ही बन जाते हैं। भारतीय संस्कृति में कामुकता एक निजी मामला है और लोग इसमें निजी तौर पर इसमें शामिल होते हैं। यह उनके शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक, व सामाजिक सोच को भी दर्शाता है। वास्तव में, यह एक अच्छी बात है लेकिन यौन समस्याओं के मामले में, लोगों को अपने स्वास्थ्य के लिए स्वयं से जागरूक होने की आवश्यकता होती है और उन्हें अपनी समस्याओं के तथ्यों को समझने की भी जरुरत होती है, जो उनकी यौन समस्याओं के निदान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।


आज के इस सत्र में हम पुरुषों में होने वाली तीसरी सबसे आम गुप्त व यौन समस्या पर चर्चा करने जा रहे है, जिसे लो लिबिडो या यौन इच्छा विकार के रूप में भी जाना जाता है। विश्व प्रसिद्ध आयुर्वेदाचार्य डॉ. सुनील दुबे, जो पटना के सर्वश्रेष्ठ सेक्सोलॉजिस्ट डॉक्टर में से एक हैं, उन सभी लोगों की मदद करने वाली महत्वपूर्ण बातें साझा कर रहे है जो व्यक्ति के कम कामेच्छा के कारण अपनी यौन समस्याओं से पीड़ित होने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। डॉ. सुनील दुबे आयुर्वेदिक चिकित्सा अनुसंधान और सेक्सोलॉजी चिकित्सा विज्ञान के बहुत बड़े व अनुभवी विशेषज्ञ डॉक्टर हैं, जहाँ उन्होंने पुरुषों और महिलाओं में होने वाले बहुत सारे गुप्त व यौन समस्याओं पर अपना सफल शोध किया है। पुरुषों में कम कामेच्छा के बारे में उनका कहना है कि इस यौन समस्या के कई कारण होते हैं जैसे कि शारीरिक कारण।

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पुरुषों में होने वाले कामेच्छा में कमी के कारण:

किसी व्यक्ति के उसके यौन जीवन में कामेच्छा में कमी के कारणों के बारे में डॉ. सुनील दुबे का कहना है कि मुख्य रूप से मानसिक, मनोवैज्ञानिक, चिकित्सा, जीवनशैली और अन्य कारण उसे इस यौन समस्या की ओर ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। आइए पुरुषों के इस यौन समस्या के सभी कारणों को विस्तार से जानते है।


मनोवैज्ञानिक कारण:

  • चिंता: चिंता, तनाव और डर जो किसी व्यक्ति को उसके यौन इच्छा में बाधा डालते हैं।
  • अवसाद: मूड में उतार-चढ़ाव, गतिविधियों में रुचि की कमी या अपराध बोध की भावनाएँ।
  • आघात: किसी व्यक्ति के जीवन में यौन शोषण या उपेक्षा के पिछले अनुभव।
  • कम आत्मसम्मान: किसी व्यक्ति में नकारात्मक आत्म-छवि या आत्मविश्वास की कमी।
  • संबंध-संबंधी समस्याएँ: संघर्ष की स्थिति, संचार की समस्याएँ और अंतरंगता की कमी।


चिकित्सा कारण:

  • पुरानी बीमारी: मधुमेह, हृदय रोग, मोटापा या पुराना दर्द किसी व्यक्ति को उसके यौन इच्छा में बाधा डालते है।
  • हार्मोनल असंतुलन: टेस्टोस्टेरोन में कमी, थायरॉयड विकार या हार्मोनल परिवर्तन ऐसे कारक हैं जो किसी व्यक्ति की कामेच्छा को प्रभावित करते हैं।
  • तंत्रिका संबंधी विकार: मल्टीपल स्केलेरोसिस, रीढ़ की हड्डी की चोट और पार्किंसंस रोग ऐसे तंत्रिका संबंधी कारक हैं जो किसी व्यक्ति की यौन इच्छा को प्रभावित करते हैं।
  • नींद संबंधी विकार: अनिद्रा, स्लीप एपनिया या रेस्टलेस लेग सिंड्रोम ऐसे कारण हैं जो किसी व्यक्ति की यौन गतिविधि की इच्छा को प्रभावित करते हैं।
  • दवाएँ: एंटीडिप्रेसेंट, रक्तचाप की दवाएँ और हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी (HRT) ऐसी चिकित्सा की स्थिति हैं जहाँ दवाओं के कुछ दुष्प्रभाव व्यक्ति की यौन इच्छा को प्रभावित करते हैं।
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जीवनशैली के कारण:

  • थकान: शारीरिक या मानसिक थकावट हमेशा व्यक्ति की कामेच्छा को कम करती है।
  • अंतरंगता की कमी: अनियमित या असंतोषजनक यौन गतिविधियाँ हमेशा व्यक्ति को उसके कामेच्छा से बहुत दूर ले जाती हैं।
  • तनाव: पुराना तनाव या बर्नआउट हमेशा व्यक्ति की जीवनशैली कारक को प्रभावित करता है।
  • मादक द्रव्यों का सेवन: शराब और धूम्रपान का अत्यधिक सेवन व्यक्ति के शरीर पर नकारात्मक प्रभाव डालते है।
  • उम्र बढ़ना: बढ़ती उम्र के साथ कामेच्छा में गिरावट आना प्राकृतिक घटना है।


अन्य कारण:

  • सांस्कृतिक या धार्मिक मान्यताएँ: यौन गतिविधि या व्यवहार के प्रति प्रतिबंधात्मक दृष्टिकोण।
  • पिछले अनुभव: पिछले यौन जीवन में नकारात्मक अनुभव या आघात का होना।


पुरुषों में कामेच्छा की कमी के लिए आयुर्वेदिक चिकित्सा व उपचार:

डॉ. सुनील दुबे जो कि पिछले साढ़े तीन दशकों से बिहार के सर्वश्रेष्ठ सेक्सोलॉजिस्ट डॉक्टर रहे है, कहते हैं कि किसी भी गुप्त व यौन समस्या के उपचार के लिए सिर्फ़ आयुर्वेद के पास ही 100% सटीक उपचार व समाधान है। सबसे पहले, इस आयुर्वेदिक उपचार की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह प्राकृतिक होता है और इसका शरीर पर कोई साइड इफ़ेक्ट नहीं है साथ-ही-साथ कोई भी मरीज़ अपनी गुप्त या यौन समस्याओं को ठीक करने के लिए इसे आसानी से आजमा सकता है। कामेच्छा की कमी के कारण व्यक्ति को उसके भविष्य में इरेक्टाइल डिस्फंक्शन, शीघ्रपतन और बांझपन जैसी अन्य यौन समस्याओं से जूझना पड़ सकता है। अपने उपचार और दवा में, वे किसी भी गुप्त व यौन समस्या को दूर करने के लिए आयुर्वेद चिकित्सा व उपचार के समग्र दृष्टिकोण प्रदान करते हैं। वे सभी गुप्त व यौन समस्याओं के लिए जड़ी-बूटियाँ, प्राकृतिक रसायन, प्राकृतिक गोलियाँ, तेल, हर्बल उपचार और घरेलू उपचार प्रदान करते हैं। वास्तव में, उन्होंने यौन समस्याओं के लिए सबसे प्रभावी व गुणवत्ता-सिद्ध आयुर्वेदिक भस्म की सफलतापूर्वक खोज की है जो पुरुष और महिला यौन रोगियों के लिए रामबाण रही है।

वे आगे कहते हैं कि यौन रोग शारीरिक, मनोवैज्ञानिक, भावनात्मक और जीवनशैली कारकों से प्रभावित होते हैं। इस स्थिति में, वे तनाव प्रबंधन तकनीकों, व्यवहार चिकित्सा और चिंता-विरोधी चिकित्सा के रूप में कुछ महत्वपूर्ण स्वास्थ्य दिशा-निर्देश और गैर-चिकित्सा उपचार भी प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद और प्राकृतिक सप्लीमेंट यौन समस्याओं को सुधारने में सहायक तत्व हैं। कुछ फल व्यक्ति में उसके कम कामेच्छा को सुधारने में सहायक होते हैं जैसे आम, अनार, तरबूज, अनानास, एवोकाडो, अंगूर, अंजीर पपीता आदि। कामेच्छा बढ़ाने के लिए व्यक्ति को इन फलों को अपने दैनिक आहार में शामिल कर सकता है।


यदि आप किसी भी प्रकार की गुप्त व यौन समस्या का सामना कर रहे हैं और यह आपके दैनिक जीवन में लगातार बनी रहती है, तो आपको व्यक्तिगत सहायता, उपचार और दवा के लिए किसी अनुभवी क्लीनिकल सेक्सोलॉजिस्ट डॉक्टर से परामर्श करना चाहिए। वह आपके कम यौन इच्छा के अंतर्निहित कारणों की पहचान करने और एक व्यक्तिगत उपचार योजना विकसित करने में मदद करते है। सुरक्षित, प्रभावी और विश्वसनीय आयुर्वेदिक चिकित्सा व उपचार के लिए दुबे क्लिनिक पर जाने के लिए फोन पर इस क्लिनिक से अपॉइंटमेंट लें।


हार्दिक सम्मान के साथ:

दुबे क्लिनिक

भारत का एक प्रमाणित आयुर्वेद और सेक्सोलॉजी क्लिनिक

विश्व-प्रसिद्ध आयुर्वेदाचार्य डॉ. सुनील दुबे

(गोल्ड मेडलिस्ट व भारत गौरव से सम्मानित सेक्सोलॉजिस्ट)

अपॉइंटमेंट समय: सुबह 08:00 बजे से शाम 08:00 बजे तक (हर दिन)

!!!हेल्पलाइन नंबर: +91 98350 92586!!!

वेन्यू: दुबे मार्केट, लंगर टोली, चौराहा, पटना-04

Sunday, January 12, 2025

Best Sexologist Patna Diabetes ED Treatment | Dr. Sunil Dubey

 मेडिकल साइंस के शोध के अनुसार, टाइप 2 मधुमेह वाले करीब-करीब आधे पुरुषों में निदान के 10 वर्षों के भीतर स्तंभन दोष (नपुंसकता) विकसित हो जाने की संभावना होती है। हालाँकि, जीवनशैली में बदलाव करके स्तंभन दोष को दूर करने के कुछ तरीके हैं, जिसमें स्वस्थ आहार, नियमित व्यायाम और शराब और धूम्रपान से बचाव शामिल होता है।


यह कैसे आम है?

हालाँकि मधुमेह रोग और स्तंभन दोष (ईडी) दो अलग-अलग तरह की स्थितियाँ हैं, लेकिन वे एक-दूसरे के साथ-साथ चलते हैं। स्तंभन दोष को स्तंभन प्राप्त करने या बनाए रखने में कठिनाई के रूप में परिभाषित किया जाता है। जिन पुरुषों को मधुमेह होता है, उनमें स्तंभन दोष विकसित होने की संभावना तीन गुना से भी अधिक होती है। जब स्तंभन दोष 45 वर्ष या उससे कम आयु के पुरुषों में विकसित होता है, तो यह टाइप 2 मधुमेह का संकेत हो सकता है।


मधुमेह एक ऐसी बीमारी है जो तब होती है जब रोगी के रक्तप्रवाह में बहुत अधिक शर्करा प्रवाहित होती है। आम तौर पर, मधुमेह के दो मुख्य प्रकार होते हैं: टाइप 1 मधुमेह और टाइप 2 मधुमेह।

  • टाइप 1 मधुमेह: जो मधुमेह वाले 10% से भी कम लोगों को प्रभावित करता है।
  • टाइप 2 मधुमेह: जो मधुमेह के 90% से अधिक मामलों के लिए जिम्मेदार कारक है। यह अक्सर अधिक वजन या निष्क्रियता के परिणामस्वरूप विकसित होता है।

एक अनुमानित तौर पर यह पाया गया है कि 40 से 70 वर्ष की आयु के 10% पुरुषों में गंभीर स्तंभन दोष की समस्या होती है, और अन्य 25% में मध्यम स्तंभन दोष होते है। पुरुषों की उम्र बढ़ने के साथ-साथ उसमे स्तंभन दोष की समस्या अधिक आम हो जाता है, हालांकि यह उम्र बढ़ने का एक अनिवार्य हिस्सा नहीं है। कई पुरुषों के लिए, मधुमेह जैसी अन्य स्वास्थ्य स्थितियां इस पुरुष यौन समस्या स्तंभन दोष के विकास की संभावनाओं में योगदान करती हैं।

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विश्व प्रसिद्ध आयुर्वेदाचार्य डॉ. सुनील दुबे, जो पटना के सर्वश्रेष्ठ सेक्सोलॉजिस्ट डॉक्टरों में से एक हैं, बताते हैं कि टाइप 2 मधुमेह के रोगियों में 5-10 वर्षों के भीतर स्तंभन दोष से पीड़ित होने की सबसे अधिक संभावना होती है। जिन पुरुषों को हृदय रोग है, उनमें नपुंसकता होने की संभावना और भी अधिक बढ़ जाती है। वास्तव में, स्तंभन दोष को हृदय रोग का प्रारंभिक संकेत माना जाता है।


उन्होंने पुरुषों की गुप्त व यौन समस्याओं के पूरे स्पेक्ट्रम पर अपना शोध किया है जो शारीरिक, मनोवैज्ञानिक, चिकित्सा और अंतर्निहित स्वास्थ्य स्थितियों के कारण होते हैं। उनका सुझाव है कि यदि मधुमेह रोगी स्वस्थ जीवनशैली अपनाता है, तो वह मधुमेह के लक्षणों को कम कर सकता है और अपने यौन स्वास्थ्य को बेहतर बना सकता है। मुख्य रूप से, इस जीवनशैली में संतुलित आहार लेना और नियमित रूप से व्यायाम करना शामिल है।


मधुमेह वाले पुरुषों में इरेक्टाइल डिसफंक्शन कारणों के बारे में:

डॉ. सुनील दुबे कहते हैं कि मधुमेह और इरेक्टाइल डिसफंक्शन के बीच संबंध व्यक्ति के रक्त परिसंचरण और तंत्रिका तंत्र से जुड़ा हुआ है। मधुमेह की स्थिति में, खराब नियंत्रित रक्त शर्करा का स्तर छोटी रक्त वाहिकाओं और नसों को नुकसान पहुंचाता है। यौन उत्तेजना और प्रतिक्रिया को नियंत्रित करने वाली नसों को नुकसान पुरुष की संभोग में भाग लेने के लिए पर्याप्त कठोर इरेक्शन प्राप्त करने की क्षमता को ख़राब कर सकता है। क्षतिग्रस्त रक्त वाहिकाओं से कम रक्त प्रवाह भी मधुमेह रोगी में इरेक्टाइल डिसफंक्शन (स्तंभन दोष) में योगदान दे सकता है।

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पुरुषों में होने वाले इरेक्टाइल डिसफंक्शन के लिए कुछ सामान्य जोखिम कारक:

आम तौर पर, कई ऐसे जोखिम कारक हैं जो मधुमेह की जटिलताओं की संभावना को बढ़ा सकते हैं, जिसमें इरेक्टाइल डिसफंक्शन भी शामिल है। पुरुषों में होने वाले इरेक्टाइल डिसफंक्शन के लिए निम्नलिखित सामान्य जोखिम कारक हैं-

  • शरीर में खराब नियंत्रित रक्त शर्करा का होना।
  • तनावपूर्ण जीवनशैली, चिंता और अवसाद।
  • खराब आहार और दैनिक जीवन में निष्क्रियता।
  • मोटापा या अधिक वजन का होना।
  • शराब या धूम्रपान का अत्यधिक सेवन।
  • अनियंत्रित उच्च रक्तचाप का होना।
  • असामान्य रक्त कामेच्छा प्रोफ़ाइल।
  • ऐसी दवाएँ जो ईडी के साइड इफ़ेक्ट का कारण बनती हैं।
  • उच्च रक्तचाप, दर्द या अवसाद के लिए प्रिस्क्रिप्शन दवाएँ।


पुरुषों में होने वाले इरेक्टाइल डिसफंक्शन का निदान:

यदि आप अपने इरेक्शन की आवृत्ति या अवधि में बदलाव या कमी का अनुभव करते हैं या ऐसा नोटिस करते हैं, तो यह एक अनुभवी नैदानिक सेक्सोलॉजिस्ट डॉक्टर से परामर्श करने का सही समय है। वास्तव में, रोगी के मेडिकल इतिहास की समीक्षा करके और समस्याओं के लक्षणों तक पहुँचकर इरेक्टाइल डिसफंक्शन का निदान किया जाता है। एक अनुभवी सेक्सोलॉजिस्ट पेनिले या अंडकोष में संभावित तंत्रिका समस्याओं की पहचान करने के लिए शारीरिक जाँच करते है। यह संभव है कि रक्त और मूत्र परीक्षण मधुमेह या कम टेस्टोस्टेरोन जैसी समस्या का निदान करने में मदद कर सकते हैं।

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डॉ. सुनील दुबे जो कि बिहार के सर्वश्रेष्ठ सेक्सोलॉजिस्ट डॉक्टर है, कहते हैं कि आयुर्वेदिक दृष्टिकोण और उसका चिकित्सा उपचार की एक प्राकृतिक पद्धति है। मूल रूप से, आयुर्वेद सभी औषधियों का आधार होता है और यह संपूर्ण गुप्त व यौन समस्याओं से जड़ से मुक्ति दिलाने का कार्य करता है। आम तौर पर मधुमेह के मामले में व्यक्ति अपनी मध्यम और पुरानी इरेक्टाइल डिसफंक्शन (स्तंभन दोष) की समस्या से जूझता रहता है यहाँ आयुर्वेदिक चिकित्सा व उपचार मधुमेह और इरेक्टाइल डिसफंक्शन दोनों रोगो में सुधार करती है।


निदान के समय, यदि आपमें स्तंभन दोष के कोई लक्षण नहीं हैं, लेकिन मधुमेह या हृदय रोग का निदान किया गया है, तो आपको अपने स्वास्थ्य देखभाल पेशेवर के साथ भविष्य के निदान की संभावना पर चर्चा करनी चाहिए।


आयुर्वेद के माध्यम से स्तंभन दोष का इलाज:

यदि किसी यौन रोगी को उसके स्तंभन दोष का निदान किया जाता है; तो सबसे प्रभावी और सुरक्षित मौखिक दवा आयुर्वेदिक उपचार ही होता है। आयुर्वेदिक दवा पेनिले में रक्त के प्रवाह को बेहतर बनाने में मदद करती है और सामान्य तौर पर प्राकृतिक रूप से संपूर्ण यौन समस्याओं से पूर्णकालिक समाधान व राहत प्रदान करती है। मधुमेह की बात करें तो आयुर्वेदिक दवाएँ सुरक्षित और प्रभावी समाधान प्रदान करती हैं। वे ग्लूकोफेज (मेटफॉर्मिन) या इंसुलिन जैसी मधुमेह की दवाओं के साथ नकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं करती हैं।


मधुमेह और स्तंभन दोष के रोगियों के चिकित्सा व उपचार में, डॉ. सुनील दुबे जड़ी-बूटियों, प्राकृतिक रस-रसायनों, चिकित्सकीय रूप से सिद्ध भस्मों, प्राकृतिक गोलियों, तेलों, हर्बल उपचारों के रूप में पूरी तरह से आयुर्वेदिक दृष्टिकोण और उपचार प्रदान करते हैं। उनका कहना है कि व्यक्ति में मधुमेह एक दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्या है जो उसके जीवन भर रहती है, हालाँकि टाइप 1 और टाइप 2 दोनों मधुमेह को दवा, उचित आहार और व्यायाम के माध्यम से अच्छी तरह से नियंत्रित किया जा सकता है।


हालाँकि ईडी (स्तंभन दोष) एक स्थायी स्थिति बन सकती है, लेकिन यह आमतौर पर उन पुरुषों के लिए नहीं होता है जिन्हें कभी-कभार इरेक्शन की समस्या होती है। यदि किसी व्यक्ति को मधुमेह है, तो वह पर्याप्त नींद लेने, धूम्रपान न करने और तनाव कम करने जैसी जीवनशैली अपनाकर अपने ईडी पर काबू पा सकता है। ईडी की दवाइयाँ (आयुर्वेद) आमतौर पर अच्छी तरह से सहन की जाती हैं, और किसी भी ईडी समस्या को दूर करने में मदद करने के लिए कई वर्षों तक इस्तेमाल की जा सकती हैं।

पुरुषों इरेक्टाइल डिसफंक्शन (ईडी) रोगियों के लिए रोकथाम:

  • अपने आहार के माध्यम से अपने रक्त शर्करा को नियंत्रित करना।
  • अपने शराब के सेवन को कम करना या त्याग करना।
  • धूम्रपान बंद करना या कम-से-कम करना।
  • शारीरिक रूप से हर समय सक्रिय रहना।
  • अधिक नींद लेना या गुणवत्तापूर्ण नींद लेना।
  • अपने तनाव के स्तर को कम करना।


दुबे क्लिनिक के साथ अपॉइंटमेंट बुक करें:

यदि आप अपनी मधुमेह और इरेक्टाइल डिसफंक्शन (नपुंसकता) की समस्या से हमेशा के लिए छुटकारा पाना चाहते हैं; तो आपको दुबे क्लिनिक से एक बार अवश्य जुड़ना चाहिए। यह भारत में एक प्रमाणित व अग्रणी आयुर्वेद और सेक्सोलॉजी क्लिनिक है जो सभी प्रकार के गुप्त व यौन रोगियों को आयुर्वेद के अपने समग्र दृष्टिकोण और चिकित्सा-उपचार प्रदान करता है। डॉ. सुनील दुबे इस क्लिनिक में व्यापक आयुर्वेद दृष्टिकोण के साथ सभी प्रकार के गुप्त व यौन विकारों का इलाज करते हैं। वह इस क्लिनिक में हर दिन लगभग 35-40 गुप्त व यौन रोगियों का इलाज करते हैं। भारत के विभिन्न हिस्सों से गुप्त व यौन रोगी इस क्लिनिक से जुड़ने के लिए हर दिन दुबे क्लिनिक से संपर्क करते हैं।


अधिक जानकारी के लिए:

दुबे क्लिनिक

भारत का प्रमाणित आयुर्वेद और सेक्सोलॉजी क्लिनिक

डॉ. सुनील दुबे, गोल्ड मेडलिस्ट सेक्सोलॉजिस्ट

बी.ए.एम.एस. (रांची), एम.आर.एस.एच. (लंदन), आयुर्वेद में पीएचडी (यूएसए)

क्लिनिक का समय: 08:00 AM-08:00 PM

!!!हेल्पलाइन नंबर: +91 98350-92586!!!

वेन्यू: दुबे मार्केट, लंगर टोली, चौराहा, पटना-04

Opting Best Sexologist Patna Bihar Priapism Treatment | Dr. Sunil Dubey

 पुरुषों में लंबे समय तक इरेक्शन होने का अवलोकन:

पुरुषों में उसके पेनिले के लंबे समय तक इरेक्शन को प्रियापिज्म के नाम से भी जाना जाता है। अर्ध-स्तंभन या पूर्ण-स्तंभन बिना किसी यौन उत्तेजना के कई घंटों तक जारी रहता है। मुख्य रूप से, पुरुषों में दो प्रकार के प्रियापिज्म होते हैं जिन्हें इस्केमिक और गैर-इस्केमिक के रूप में जाना जाता है। जैसा कि हम जानते हैं कि इस्केमिक प्रियापिज्म एक चिकित्सा आपातकाल की स्थिति है। इस्केमिया मानव शरीर के किसी हिस्से में सामान्य से कम मात्रा में रक्त प्रवाह की स्थिति है। रक्त प्रवाह की इस कमी का मतलब है कि ऊतकों को वह ऑक्सीजन नहीं मिल रही है जिसकी उन्हें आवश्यकता है। यह शरीर के कई अंगों में हो सकता है, जैसे कि किसी व्यक्ति का हृदय और मस्तिष्क में। इस्केमिया दिल के दौरे और स्ट्रोक जैसी जानलेवा स्थितियों को भी जन्म दे सकता है।


पुरुषों में होने वाले लंबे समय तक इरेक्शन का होना एक असामान्य स्थिति होती है, लेकिन यह कुछ समूहों में अधिक आम हो सकती है, जैसे कि सिकल सेल रोग (आनुवांशिक विकार) वाले लोग। लंबे समय तक इरेक्शन के लिए तत्काल उपचार की आवश्यकता आमतौर पर ऊतक क्षति को रोकने के लिए होती है जिसके परिणामस्वरूप इरेक्शन प्राप्त करने या बनाए रखने में असमर्थता (स्तंभन दोष) हो सकती है। लंबे समय तक इरेक्शन या लंबे समय तक इरेक्शन की समस्या आमतौर पर 30 वर्ष या उससे अधिक उम्र के पुरुषों को ज्यादातर प्रभावित करती है, लेकिन सिकल सेल रोग वाले पुरुषों में, यह समस्या बचपन से ही शुरू हो सकती है।


पुरुषों में होने वाले लंबे समय तक इरेक्शन के लक्षण:

लंबे समय तक इरेक्शन के लक्षण प्रियापिज्म के प्रकार के आधार पर भिन्न हो सकते हैं। मुख्य रूप से, प्रियापिज्म के दो प्रकार हैं इस्केमिक और गैर-इस्केमिक। इस्केमिक एक चिकित्सा आपातकाल है जबकि गैर-इस्केमिक पुरुषों में एक चिकित्सा स्थिति है।

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इस्केमिक प्रियापिज्म (लंबे समय तक इरेक्शन):

विश्व-प्रसिद्ध आयुर्वेदाचार्य डॉ. सुनील दुबे जो पटना के सर्वश्रेष्ठ सेक्सोलॉजिस्ट डॉक्टर भी है, कहते है कि पुरुषों में इस्केमिक प्रियापिज्म, जिसे लो-फ्लो प्रियापिज्म के रूप में भी जाना जाता है, रक्त के पेनिले से बाहर नहीं निकल पाने का परिणाम है। रक्त पेनिले में फंस जाता है क्योंकि यह पेनिले की नसों से बाहर नहीं निकल पाता है या पेनिले के स्तंभन ऊतक के भीतर चिकनी मांसपेशियों के संकुचन में कोई समस्या होती है। इस्केमिक प्रियापिज्म, प्रियापिज्म का सबसे आम प्रकार है और पेनिले के ऊतकों तक पर्याप्त ऑक्सीजन न पहुंचने के कारण होने वाली जटिलताओं को रोकने के लिए तत्काल चिकित्सा देखभाल की आवश्यकता होती है।


पुरुषों में इस्केमिक प्रियापिज्म के संकेत और लक्षण निम्नलिखित हैं:

  • एक इरेक्शन जो चार घंटे से अधिक समय तक रहता है या यौन रुचि या उत्तेजना से संबंधित नहीं है।
  • एक कठोर पेनिले शाफ्ट, लेकिन पेनिले का सिर (ग्लान्स) नरम है।
  • पेनिले में दर्द बढ़ना समय दर समय।


नॉन-इस्केमिक प्रियापिज्म (लंबे समय तक इरेक्शन):

नॉन-इस्केमिक प्रियापिज्म, जिसे हाई-फ्लो प्रियापिज्म के नाम से भी जाना जाता है, यह तब होता है जब पेनिले की धमनियों में रक्त का प्रवाह ठीक से काम नहीं कर रहा होता है। हालाँकि, पेनिले के ऊतकों को कुछ रक्त प्रवाह और ऑक्सीजन मिलना जारी रहता है। नॉन-इस्केमिक प्रियापिज्म अक्सर आघात या चोट के कारण होता है।

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पुरुषों में नॉन-इस्केमिक प्रियापिज्म के संकेत और लक्षण निम्नलिखित हैं:

  • चार घंटे से अधिक समय तक इरेक्शन या यौन रुचि या उत्तेजना से संबंधित नहीं है।
  • पेनिले का खड़ा होना लेकिन पूरी तरह से कठोर न होना।
  • आमतौर पर पेनिले में दर्द नहीं होना।


प्रियापिज्म के लिए सेक्सोलॉजिस्ट डॉक्टर से कब परामर्श करें:

यदि आपका इरेक्शन चार घंटे से अधिक समय तक रहता है, तो आपको आपातकालीन देखभाल की आवश्यकता है। आपातकालीन कक्ष के डॉक्टर यह निर्धारित करेंगे कि आपको इस्केमिक प्रियापिज्म है या नॉन-इस्केमिक प्रियापिज्म। यदि आपको बार-बार, लगातार, दर्दनाक इरेक्शन का अनुभव होता है जो अपने आप ठीक हो जाता है, तो अपने डॉक्टर से मिलें। आपको आगे की घटनाओं को रोकने के लिए उपचार की आवश्यकता हो सकती है।


कारण:

डॉ. सुनील दुबे, बिहार के सर्वश्रेष्ठ सेक्सोलॉजिस्ट डॉक्टर का कहना है कि आमतौर पर इरेक्शन शारीरिक या मनोवैज्ञानिक उत्तेजना के जवाब में होता है। यह उत्तेजना कुछ चिकनी मांसपेशियों को शिथिल कर देती है, जिससे पेनिले में स्पंजी ऊतकों में रक्त का प्रवाह बढ़ जाता है। नतीजतन, रक्त से भरा पेनिले खड़ा हो जाता है। उत्तेजना समाप्त होने के बाद, रक्त बाहर निकल जाता है और पेनिले अपनी गैर-कठोर (ढीली) अवस्था में वापस आ जाता है।


प्रियापिज्म की स्थिति तब होता है जब इस प्रणाली का कोई भी हिस्सा - रक्त, वाहिकाएँ, चिकनी मांसपेशियाँ या तंत्रिकाएँ - सामान्य रक्त प्रवाह को बदल देती हैं, और इरेक्शन लंबे समय तक बना रहता है। प्रियापिज्म का अंतर्निहित कारण अक्सर निर्धारित नहीं किया जा सकता है, लेकिन कई स्थितियाँ इसके लिए भूमिका निभा सकती हैं।

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रक्त विकार

रक्त से संबंधित बीमारियाँ प्रियापिज्म में योगदान कर सकती हैं - सबसे आम तौर पर इस्केमिक प्रियापिज्म, जब रक्त पेनिले से बाहर नहीं निकल पाता है। इन विकारों में शामिल हैं:

  • सिकल सेल रोग।
  • ल्यूकेमिया।
  • अन्य रक्त रोग (हेमेटोलॉजिक डिस्क्रैसिया), जैसे थैलेसीमिया और मल्टीपल मायलोमा।

बच्चों में सबसे आम रोग सिकल सेल रोग है।



प्रिस्क्रिप्शन दवाएँ

प्रियैपिज्म, जिसे आमतौर पर इस्केमिक प्रियैपिज्म कहा जाता है, कई दवाओं का संभावित दुष्प्रभाव है, जिनमें शामिल हैं:

  • इरेक्टाइल डिसफंक्शन के इलाज के लिए पेनिले में सीधे इंजेक्ट की जाने वाली दवाएँ।
  • एंटीडिप्रेसेंट की दवाएँ।
  • अल्फा ब्लॉकर्स की दवाएँ।
  • चिंता या मानसिक विकारों के इलाज के लिए इस्तेमाल की जाने वाली दवाएँ।
  • रक्त को पतला करने वाली दवाएँ।
  • ध्यान-घाटे/अति सक्रियता विकार के इलाज के लिए इस्तेमाल की जाने वाली दवाएँ।


शराब और नशीली दवाओं का उपयोग:

शराब, मारिजुआना, कोकीन और अन्य दवाएँ प्रियापिज़्म का कारण बन सकती हैं, विशेष रूप से इस्केमिक प्रियापिज़्म।

चोट

गैर-इस्केमिक प्रियापिज़्म का एक सामान्य कारण आपके पेनिले, श्रोणि या पेनिले के आधार और गुदा (पेरिनेम) के बीच के क्षेत्र में आघात या चोट है।


अन्य कारक

प्रियापिज्म के अन्य कारणों में शामिल हैं:

  • मकड़ी के काटने, बिच्छू के डंक मारने या अन्य विषैले संक्रमण।
  • गाउट या एमिलॉयडोसिस सहित चयापचय संबंधी विकार।
  • तंत्रिका संबंधी विकार, जैसे रीढ़ की हड्डी में चोट या उपदंश।
  • पेनिले से जुड़े कैंसर।


जटिलताएँ

इस्केमिक प्रियापिज्म गंभीर जटिलताएँ पैदा कर सकता है। पेनिले में फंसा हुआ रक्त ऑक्सीजन से वंचित हो जाता है। जब इरेक्शन बहुत लंबे समय तक रहता है - आमतौर पर चार घंटे से अधिक - तो ऑक्सीजन की यह कमी पेनिले में ऊतकों को नुकसान पहुँचाना या नष्ट करना शुरू कर सकती है। अनुपचारित प्रियापिज्म से इरेक्टाइल डिसफंक्शन हो सकता है।


रोकथाम

यदि आपको हकलाने की समस्या है, तो आपका डॉक्टर भविष्य में होने वाली घटनाओं को रोकने के लिए निम्नलिखित की सिफारिश कर सकता है:

  • सिकल सेल रोग जैसी अंतर्निहित स्थिति के लिए उपचार, जो प्रियापिज्म का कारण बन सकता है।
  • मौखिक या इंजेक्शन योग्य फिनाइलफ्राइन का उपयोग।
  • हार्मोन-अवरोधक दवाएँ - केवल वयस्क पुरुषों के लिए।
  • इरेक्टाइल डिसफंक्शन को प्रबंधित करने के लिए उपयोग की जाने वाली मौखिक दवाओं का उपयोग।


अधिक जानकारी के लिए:

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भारत का प्रमाणित आयुर्वेद और सेक्सोलॉजी क्लिनिक

डॉ. सुनील दुबे, गोल्ड मेडलिस्ट सेक्सोलॉजिस्ट

बी.ए.एम.एस. (रांची), एम.आर.एस.एच. (लंदन), आयुर्वेद में पीएचडी (यूएसए)

क्लिनिक का समय: 08:00 AM-08:00 PM

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वेन्यू: दुबे मार्केट, लंगर टोली, चौराहा, पटना-04

Saturday, January 11, 2025

Best Sexologist Patna Bihar ED Therpay through Ayurveda | Dr. Sunil Dubey

 पुरुषों में होने वाले इरेक्टाइल डिसफंक्शन (नपुंसकता) के बारे में एक महत्वपूर्ण जानकारी:

पुरुषों में होने वाला सबसे आम यौन समस्या जिसे इरेक्टाइल डिसफंक्शन (स्तंभन दोष) या नपुंसकता भी कहा जाता है, यह स्थिति पुरुषों के यौन प्रदर्शन के लिए पर्याप्त रूप से दृढ़ इरेक्शन प्राप्त करने या बनाए रखने में असमर्थता की स्थिति को दर्शाता है। आज के समय में भारत के लोगों में, यह यौन समस्या करीबन 12 फीसदी लोगो में देखने को मिल रही है।


अगर किसी पुरुष को समय-समय पर अपने इरेक्शन को प्राप्त करने में परेशानी हो रही है, तो यह कोई गंभीर मामला या चिंता की स्थिति नहीं है। इसके ठीक विपरीत, अगर कोई पुरुष इस इरेक्टाइल डिसफंक्शन (स्तंभन दोष) से जूझ रहा है और यह उसके यौन जीवन में लगातार बना हुआ है, तो यह उनके लिए तनाव का कारण बन सकता है, व्यक्ति के आत्मविश्वास को प्रभावित कर सकता है और उसके रिश्तों में समस्याएँ भी पैदा कर सकता है। इरेक्शन प्राप्त करने या बनाए रखने में समस्याएँ किसी अंतर्निहित स्वास्थ्य स्थिति का संकेत भी हो सकती हैं, जिसका उपचार करने की आवश्यकता है और यह पुरुषों में हृदय रोग के लिए एक जोखिम कारक भी हो सकता है।


अगर आप अपने यौन समस्या जैसे कि इरेक्टाइल डिसफंक्शन के बारे में चिंतित हैं, तो अपने यौन स्वास्थ्य चिकित्सक से बात करें - भले ही आपको शर्मिंदगी महसूस हो या न हो। एक अनुभवी क्लिनिकल सेक्सोलॉजिस्ट गुप्त व यौन रोगी का इलाज कर सकता है, यह जानते हुए कि अंतर्निहित स्थिति इस इरेक्टाइल डिसफंक्शन को ठीक करने के लिए पर्याप्त है। अन्य मामलों में, इस यौन समस्या को ठीक करने के लिए आयुर्वेदिक दवा या हर्बल उपचार सबसे प्रभावी चिकित्सा की पद्धति हैं।

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पुरुषों में इरेक्टाइल डिसफंक्शन होने के लक्षण:

विश्व प्रसिद्ध आयुर्वेदाचार्य डॉ. सुनील दुबे, जो पटना के सर्वश्रेष्ठ सीनियर सेक्सोलॉजिस्ट में से एक हैं, बताते हैं कि पुरुषों में होने वाले इस शारीरिक यौन समस्या के कुछ लक्षण होते हैं। उन्होंने पुरुषों के संपूर्ण गुप्त व यौन समस्याओं और पुरुषों में इरेक्शन की समस्याओं के लक्षणों पर अपना शोध किया है, उनका कहना है कि निम्नलिखित लक्षण किसी व्यक्ति के यौन जीवन भर बने रह सकते हैं।

  • किसी व्यक्ति को अपने पेनिले को ठीक से खड़ा करने में परेशानी होना।
  • व्यक्ति को अपने इरेक्शन पाने या बनाए रखने में परेशानी होना।
  • व्यक्ति की यौन इच्छा का दिन-ब-दिन कम होते जाना।


भारत के इस सीनियर सेक्सोलॉजिस्ट डॉक्टर का यह भी कहना है कि मधुमेह, हृदय रोग या अन्य ज्ञात स्वास्थ्य स्थितियाँ जैसे उच्च कोलेस्ट्रॉल, मोटापा, पेरोनी रोग आदि इरेक्टाइल डिसफंक्शन (स्तंभन दोष) से जुड़ी हो सकती हैं। अगर कोई पुरुष अपने इरेक्शन को लेकर चिंतित है या उसे समय से पहले या देरी से स्खलन जैसी अन्य यौन समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है; तो उसे व्यक्तिगत मदद और उपचार के लिए किसी अनुभवी क्लिनिकल सेक्सोलॉजिस्ट डॉक्टर से सलाह लेने में देर नहीं करनी चाहिए।


पुरुषों में होने वाले इरेक्टाइल डिसफंक्शन (नपुंसकता) के कारण:

विश्व-प्रसिद्ध आयुर्वेदाचार्य डॉ. सुनील दुबे कहते हैं कि पुरुष में होने वाला यौन उत्तेजना एक जटिल प्रक्रिया है जिसमें मस्तिष्क, हार्मोन (टेस्टोस्टेरोन), भावनाएं, तंत्रिकाएं, मांसपेशियां और रक्त वाहिकाएं आदि शामिल होते हैं। इनमें से किसी भी कारक में समस्या के कारण पुरुषों में इरेक्टाइल डिसफंक्शन की समस्या हो सकता है। इसी तरह, चिंता, अवसाद और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं पुरुषों में इरेक्टाइल डिसफंक्शन (स्तंभन दोष) का कारण बन सकता हैं या उसे और खराब कर सकती हैं।

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मुख्य रूप से, शारीरिक, मनोवैज्ञानिक, भावनात्मक, और जीवनशैली जैसे सामान्य कारक यौन स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण कारक हैं। इरेक्टाइल डिसफंक्शन की इस स्थिति में, ज़्यादातर समय शारीरिक और मनोवैज्ञानिक कारक व्यक्ति को इस यौन समस्या की ओर ले जाते हैं। डॉ. सुनील दुबे कहते हैं कि कभी-कभी शारीरिक और मनोवैज्ञानिक कारकों का संयोजन पुरुषों में इरेक्टाइल डिसफंक्शन का कारण बनता है। उदाहरण के लिए, एक छोटी सी शारीरिक स्थिति जो यौन प्रतिक्रिया को कम करती है, पुरुष में इरेक्शन को बनाए रखने के बारे में चिंता पैदा कर सकती है। लगातार चिंता की स्थिति इरेक्टाइल डिसफंक्शन का कारण बन सकती है।


इरेक्टाइल डिसफंक्शन के शारीरिक कारण:

कई मामलों में, स्तंभन दोष शारीरिक कारणों से होता है।

  • हृदय रोग व रक्त वाहिकाओं का बंद होना।
  • उच्च कोलेस्ट्रॉल व उच्च रक्तचाप का होना।
  • मधुमेह, मोटापा, व मेटाबोलिक सिंड्रोम का होना।
  • पार्किंसंस रोग और पेरोनी रोग का होना।
  • मल्टीपल स्केलेरोसिस का होना।
  • कुछ निर्धारित दवाएँ का दुष्प्रभाव।
  • नींद संबंधी विकार होने पर।
  • प्रोस्टेट कैंसर या बढ़े हुए प्रोस्टेट के लिए उपचार।
  • सर्जरी या चोटें जो श्रोणि क्षेत्र या रीढ़ को प्रभावित करती हैं।
  • कम टेस्टोस्टेरोन व यौन हॉर्मोन का असंतुलित होना।
  • तंबाकू का सेवन, शराब और अन्य प्रकार के पदार्थों का दुरुपयोग।


इरेक्टाइल डिसफंक्शन के मनोवैज्ञानिक कारण:

डॉ. सुनील दुबे जो बिहार के सर्वश्रेष्ठ सेक्सोलॉजिस्ट डॉक्टर है, का कहना है कि मस्तिष्क शारीरिक घटनाओं और गतिविधियों की श्रृंखला को प्रेरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जो किसी व्यक्ति में उसके यौन उत्तेजना और उत्तेजना की भावनाओं से शुरू होकर इरेक्शन की ओर ले जाती है। कई चीजें यौन भावनाओं में बाधा डाल सकती हैं और इरेक्टाइल डिसफंक्शन का कारण बन सकती हैं या उसे खराब कर सकती हैं। इनमें निम्नलिखित कारण शामिल हो सकते हैं:

  • लगातार चिंता, अवसाद या अन्य मानसिक स्वास्थ्य स्थितियां।
  • तनाव, परिवार के बारे में अधिक बोझ व दबाव की स्थिति।
  • तनाव, खराब संचार या अन्य चिंताओं के कारण रिश्ते की समस्याएं।
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इरेक्टाइल डिसफंक्शन के लिए कुछ जोखिम कारक:

जैसे-जैसे किसी व्यक्ति की उम्र बढ़ती है, उसके इरेक्शन को विकसित होने में अधिक समय लगता है और यह उतना दृढ़ नहीं होता हो पहले था। व्यक्ति को अपने यौन प्रदर्शन के लिए इरेक्शन प्राप्त करने और बनाए रखने के लिए उसे पेनिले को अधिक सीधे स्पर्श की आवश्यकता होती है। ऐसे कई जोखिम कारक हैं जो पुरुषों में स्तंभन दोष (इरेक्टाइल डिस्फंक्शन) के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं:

  • चिकित्सा की स्थितियाँ, विशेष रूप से मधुमेह या हृदय संबंधी स्थितियाँ।
  • कुछ चिकित्सा उपचार, जैसे कि प्रोस्टेट सर्जरी या कैंसर के लिए विकिरण उपचार।
  • उच्च रक्तचाप, दर्द या प्रोस्टेट स्थितियों के इलाज के लिए एंटीडिप्रेसेंट, एंटीहिस्टामाइन और दवाओं सहित दवाएँ।
  • अधिक वजन होना, खासकर अगर आप मोटे हैं जो आपके शरीर के अनुरूप न हो।
  • चोटें, खासकर अगर वे इरेक्शन को नियंत्रित करने वाली नसों या धमनियों को नुकसान पहुँचाती हैं।
  • मनोवैज्ञानिक स्थितियाँ, जैसे कि तनाव, चिंता या अवसाद का होना।
  • शराब और धूम्रपान का सेवन, जो नसों और धमनियों में रक्त के प्रवाह को प्रतिबंधित करता है, समय के साथ पुरानी स्वास्थ्य स्थितियों को जन्म दे सकता है जो इरेक्टाइल डिसफंक्शन का कारण बनता है।


इरेक्टाइल डिसफंक्शन की जटिलताएं:

जब कोई व्यक्ति इरेक्टाइल डिसफंक्शन (स्तंभन दोष) के कारण अपने यौन जीवन से जूझता है, तो उसे अपने जीवन में कुछ जटिलताओं का सामना करना पड़ता है। किसी व्यक्ति में इरेक्टाइल डिसफंक्शन से उत्पन्न होने वाली जटिलताओं में निम्नलिखित चीज़ें शामिल हो सकती हैं।

  • असंतोषजनक यौन जीवन जीना।
  • जीवन में तनाव या चिंता की स्थिति।
  • शर्मिंदगी या कम आत्मसम्मान होना।
  • जोड़े में रिश्ते की समस्याएं का बना रहना।
  • अपने साथी को गर्भवती करने में असमर्थता का होना।

इरेक्टाइल डिसफंक्शन की रोकथाम:

डॉ. सुनील दुबे कहते हैं कि यदि कोई व्यक्ति अपने जीवन को इरेक्टाइल डिस्फंक्शन से अपने आपको मुक्त रखना चाहता है, तो उसे अपनी स्वास्थ्य स्थितियों का प्रबंधन करके एक स्वस्थ जीवन शैली बनाए रखने की आवश्यकता होती है।

  • मधुमेह, हृदय रोग और अन्य पुरानी स्वास्थ्य स्थितियों का प्रबंधन करना।
  • नियमित जांच और मेडिकल स्क्रीनिंग टेस्ट करवाना।
  • अत्यधिक शराब पीने की आदत और धूम्रपान करने जैसी आदत को त्याग देना।
  • रोजाना व्यायाम और योग अभ्यास करना साथ ही साथ तनाव का प्रबंधन करना।
  • चिंता, अवसाद या मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के लिए मदद लेने के लिए तैयार रहना।


दुबे क्लिनिक में स्तंभन दोष के लिए आयुर्वेदिक चिकित्सा व उपचार:

दुबे क्लिनिक भारत का एक प्रमाणित और अग्रणी आयुर्वेद और सेक्सोलॉजी मेडिकल साइंस क्लिनिक है जो पटना के लंगर टोली, चौराहा में स्थित है। यह क्लिनिक आयुर्वेद और सेक्सोलॉजी चिकित्सा विज्ञान पर आधारित चिकित्सा उपकरणों के पूरे सेट से सुसज्जित है। डॉ. सुनील दुबे इस क्लिनिक में प्रतिदिन अभ्यास करते हैं और हर तरह के गुप्त व यौन रोगियों को अपना व्यापक आयुर्वेदिक उपचार और दवा प्रदान करते हैं। यह क्लिनिक आयुर्वेद के समग्र दृष्टिकोण के तहत पुरुष और महिला गुप्त व यौन रोगियों को समस्त चिकित्सा व उपचार प्रदान करता है। हर दिन भारत के विभिन्न स्थानों से सौ से अधिक गुप्त व यौन रोगी इस क्लिनिक से फोन पर संपर्क करते हैं और लगभग चालीस लोग अपने इलाज और दवा के लिए इस क्लिनिक में आते हैं। डॉ. सुनील दुबे हर गुप्त व यौन रोगी का इलाज उनकी यौन समस्याओं के अनुसार करते हैं। अपने उपचार में, वे प्राकृतिक चिकित्सा, जड़ी-बूटियाँ, प्राकृतिक गोलियाँ, चिकित्सकीय रूप से सिद्ध भस्म, हर्बल उपचार, घरेलू उपचार और वैकल्पिक दवाएँ प्रदान करते हैं।


यदि आप दुबे क्लिनिक से जुड़ना चाहते हैं तो फोन पर अपॉइंटमेंट लें और स्थायी समाधान के लिए क्लिनिक पर आएं।


अधिक जानकारी के लिए:

दुबे क्लिनिक

भारत का प्रमाणित आयुर्वेद और सेक्सोलॉजी क्लिनिक

डॉ. सुनील दुबे, गोल्ड मेडलिस्ट सेक्सोलॉजिस्ट

बी.ए.एम.एस. (रांची), एम.आर.एस.एच. (लंदन), आयुर्वेद में पीएचडी (यूएसए)

क्लिनिक का समय: 08:00 AM-08:00 PM

!!!हेल्पलाइन नंबर: +91 98350-92586!!!

वेन्यू: दुबे मार्केट, लंगर टोली, चौराहा, पटना-04

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