Tuesday, September 16, 2025

Pemarital counseling build stronger relationships: Dr Sunil Dubey

Premarital counseling: The key to sexual health Dr. Sunil Dubey

क्या आप शादी करने जा रहे हैं? दरअसल, आपकी यौन इच्छा और साथी की संतुष्टि को लेकर आपके मन में कुछ सवाल हैं। जहाँ एक तरफ आप पता हैं कि यौन प्रतिक्रिया चक्र चार चरणों में काम करता है - इच्छा, आनंद, चरमोत्कर्ष और समाधान; वहीं दूसरी ओर, आपकी महिला यौन इच्छा और उत्तेजना को लेकर भी आपके मन में कुछ सवाल हैं। आप अपने शारीरिक और मानसिक यौन स्वास्थ्य को बेहतर और समृद्ध बनाना चाहते हैं जो आपके वैवाहिक जीवन की नींव बन सके।

विश्व प्रसिद्ध आयुर्वेदाचार्य डॉ. सुनील दुबे, जो पटना के सर्वश्रेष्ठ सेक्सोलॉजिस्ट डॉक्टर हैं, कहते हैं कि किसी योग्य सेक्सोलॉजिस्ट या थेरेपिस्ट से विवाह पूर्व परामर्श यौन स्वास्थ्य और समग्र कल्याण में सुधार लाने में सहायक होता है। दरअसल, भारत में यौन शिक्षा का कोई प्रावधान नहीं है, इसलिए ज़्यादातर लोग अपने यौन स्वास्थ्य और उसके विकारों का ध्यान नहीं रख पाते। आमतौर पर, यौन स्वास्थ्य के लिए जैविक, मनोवैज्ञानिक, भावनात्मक, पर्यावरणीय, सामाजिक, पालन-पोषण और जीवनशैली जैसे कई कारक महत्वपूर्ण होते हैं जो किसी व्यक्ति के निजी व वैवाहिक जीवन में देखने को मिलते है।

आज के सत्र में, भारत के इस सीनियर क्लिनिकल सेक्सोलॉजिस्ट डॉक्टर ने पुरुषों और महिलाओं की विवाहपूर्व परामर्श के बारे में अपने अनुभव और ज्ञान को साझा किया। वह दुबे क्लिनिक में प्रतिदिन अभ्यास करते हैं और पुरुषों और महिलाओं को अपनी यौन चिकित्सा और परामर्श सेवाएँ प्रदान करते हैं। भारत में, वह सबसे अधिक मांग वाले यौन स्वास्थ्य सेवा पेशेवरों में से एक हैं, जो ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यमों से पूरे भारत और विदेशों में लोगों को अपनी यौन चिकित्सा और दवाइयाँ प्रदान करते हैं।

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विवाहपूर्व परामर्श क्या है?

डॉ. सुनील दुबे बताते है कि विवाहपूर्व परामर्श एक प्रकार की चिकित्सा या शिक्षा की प्रणाली है जो जोड़ों को विवाह के लिए तैयार करने में मदद करने के लिए निर्मित व्यवस्था है। यह जोड़ों को उनके महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा करने और ऐसे कौशल विकसित करने के लिए एक सुव्यवस्थित वातावरण प्रदान करता है जो एक स्वस्थ, अधिक संतोषजनक और स्थायी विवाह की ओर ले जाने में मदद करते हैं। भारत में, इस प्रकार की व्यवस्था बहुत कम है लेकिन कुछ महानगरीय शहरों में देखने को मिल सकती है। आज के समय में, शादी के कुछ समय बाद तलाक भी बहुतायत मात्रा में देखने को मिलते है इसके पीछे का विज्ञान व्यक्ति के संबंध-पूरक व यौन जीवन से काफी हद तक जुड़ा होता है।

विवाहपूर्व परामर्श का उद्देश्य है:

जोड़े के बीच संचार कौशल में सुधार करना: इस परामर्श का मुख्य उद्देश्य, जोड़े को अपने विचारों और भावनाओं को स्पष्ट रूप से व्यक्त करना होता है, जिससे वे सक्रिय श्रवण कौशल भी विकसित करते हैं, जिससे उन्हें एक-दूसरे को गहराई से समझने और गलतफहमियों से बचने में मदद मिलती है।

संघर्ष समाधान रणनीतियाँ विकसित करना: मूलरूप से, यह संघर्ष से बचने के बारे में नहीं है, बल्कि असहमति को सम्मानपूर्वक और उत्पादक रूप से संभालने का तरीका सीखने के बारे में है, ताकि जोड़े के बीच बड़ी समस्याओं में बदलने से रोका जा सके।

जीवन के प्रमुख मुद्दों पर चर्चा करना: एक अनुभवी यौन परामर्शदाता उन सभी प्रमुख विषयों पर बातचीत कर मार्गदर्शन प्रदान करता है जो विवाहों में संघर्ष के सामान्य स्रोत बन सकते हैं। इनमें निम्नलिखित शामिल हैं:

  • वित्त-संबंधी: बजट, खर्च करने की आदतें, वित्तीय लक्ष्य और एक टीम के रूप में धन का प्रबंधन।
  • परिवार और पालन-पोषण: बच्चे पैदा करने, पालन-पोषण की शैली और ससुराल वालों के साथ संबंधों पर विचार।
  • अंतरंगता और कामुकता: शारीरिक और भावनात्मक अंतरंगता से संबंधित अपेक्षाओं और ज़रूरतों पर चर्चा।
  • मूल्य और विश्वास: मूल मूल्यों, आध्यात्मिक या धार्मिक विश्वासों और जीवन लक्ष्यों के साथ तालमेल बिठाना।
  • भूमिकाएँ और ज़िम्मेदारियाँ: विवाह और घर-परिवार में भूमिकाओं के लिए अपेक्षाओं को परिभाषित करना।

यथार्थवादी अपेक्षाएँ निर्धारित करना: परामर्श जोड़ों को "हनीमून चरण" से आगे बढ़ने और चुनौतियों और समायोजनों सहित, विवाहित जीवन कैसा होगा, इसकी अधिक यथार्थवादी समझ विकसित करने में मदद करता है। वे निजी जीवन और वैवाहिक जीवन के जीवन की अपेक्षाएँ को वास्तविक रूप से समरूप बनाने में भी उनकी मदद करते है।

संभावित समस्याओं की पहचान करना: यह जोड़ों को संघर्ष के संभावित क्षेत्रों की पहचान करने और उन्हें गंभीर समस्या बनने से पहले ही दूर करने में मदद करता है।

रिश्ते को मज़बूत बनाना: कठिन विषयों पर काम करके और नए कौशल विकसित करके, जोड़े एक-दूसरे के प्रति अपने भावनात्मक बंधन और प्रतिबद्धता को गहरा कर सकते हैं। यह किसी भी वैवाहिक जीवन के रिश्तो की मजबूती से जुड़ा वह बंधन होता है, जो किसी भी परिस्थिति में एक-दूसरे को समझते और मदद के लिए तैयार रहते है।

उच्च सफलता दर: कई शोध बताते हैं कि जो जोड़े विवाह-पूर्व परामर्श लेते हैं, उनकी वैवाहिक सफलता दर बहुत अधिक होती है और तलाक का जोखिम कम होता है। यह रिश्ते के दीर्घकालिक स्वास्थ्य और स्थिरता में एक सक्रिय निवेश भी है।

विवाहपूर्व परामर्श अक्सर लाइसेंस प्राप्त विवाह एवं पारिवारिक चिकित्सक, मनोवैज्ञानिक या धार्मिक गुरुओं द्वारा प्रदान किया जाता है। भारत में, इसकी व्यवस्था आयुर्वेदाचार्य (गुप्त व यौन रोग विशेषज्ञ व कपल थेरेपिस्ट) द्वारा देखने को मिलती है, जो सामाजिक कार्य से जुड़े होते है। यह कई रूपों में हो सकता है, जिसमें चिकित्सक के साथ व्यक्तिगत सत्र, समूह कार्यशालाएँ या ऑनलाइन कार्यक्रम शामिल हैं। नए वैवाहिक जीवन को सुदृढ़ बनाने के हित में यह परामर्श काफी हद तक कपल के बीच की समस्या को कम करने में मददगार साबित होता है। यह उन जोड़े के लिए और भी ज्यादा महत्व रखता है जहां पुरुष और महिला दोनों ऑफिस कार्य से जुड़े है।

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विवाहपूर्व परामर्श के पक्ष में तर्क और दलीलें:

सबसे पहले, विवाह पूर्व परामर्श उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण है जिन्हें यौन स्वास्थ्य, प्रतिबद्धता और नए साथी के साथ संबंध बनाने के बारे में जानकारी का अभाव है। भारत में लगभग 22-25% लोग किसी न किसी प्रकार की यौन समस्या के कारण अपने वैवाहिक या निजी जीवन से जूझ रहे हैं। भारत में अनुमानित तलाक दर 1% है, जहाँ यौन समस्याएँ इस स्थिति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। वैवाहिक जीवन में रिश्तों की समस्याओं या विवादों के आँकड़े भी जोड़ों के बीच आसानी से देखे जा सकते हैं।

जैसा कि हम सभी जानते हैं, कामुकता एक प्राकृतिक घटना है और किसी भी इंसान के जीवन का अभिन्न अंग है। यह जन्म से लेकर मृत्यु तक व्यक्ति के साथ जुड़ी रहती है, केवल चरणों में परिवर्तन होते हैं। शारीरिक, मानसिक और जीवनशैली, यौन स्वास्थ्य सहित स्वस्थ जीवन जीने के सबसे सामान्य कारक हैं, जो व्यक्ति-दर-व्यक्ति भिन्न होते है। इन सभी के अलावा, कुछ ऐसे कारक होते है जो व्यक्ति के सामाजिक परिवेश, मनोवैज्ञानिक पहलुओं, आत्म-सम्मान और लिंग-पहचान से संबंधित हैं, जहाँ व्यक्ति अपनी इच्छा, विचार, पालन-पोषण और आकांक्षा के अनुसार इस कामुकता का अनुभव करता है।

वैवाहिक जीवन दो भिन्न व्यक्तियों का मिलन होता है, जो इस सृष्टि के निर्माण में सहायक होते है।  इनका बंधन अटूट होता है साथ-ही-साथ वे इस रिश्ते में एक-दूसरे से परस्पर प्रतिबद्ध होते है। कामुकता व्यक्ति के आतंरिक आकर्षण का केंद्र भी होता है जो व्यक्ति खुले तौर पर व्यक्त नहीं कर सकता है। हां, यह सत्य है कि यौन विकार जब कामुकता को प्रभावित करता है तो व्यक्ति शारीरिक व मानसिक रूप से कमजोर पड़ने लगता है जिससे उसमे तनाव व चिंता की भावना उत्पन्न होने लगती है। विवाहपूर्व परामर्श किसी भी जोड़े के उनके समस्त जीवन को उजागर कर इसके समाधान पर केंद्रित होती है। यह परामर्श रिश्ते को मज़बूत बनाने और जोड़े को वैवाहिक जीवन की चुनौतियों और खुशियों के लिए तैयार करने में बहुत ही मददगार होते हैं।

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विवाहपूर्व परामर्श यौन मुद्दों से निपटने में कैसे मदद कर सकता है?

भारत के इस आयुर्वेदाचार्य, जो बिहार के सर्वश्रेष्ठ सेक्सोलॉजिस्ट डॉक्टर भी है का कहना है कि प्री-मैरिटल काउन्सलिंग या विवाहपूर्व परामर्श किसी भी जोड़े को उनके यौन संबंधो में होने वाली जटिलताएं और चुनौतियों को बेहतर ढंग से तैयार की गई एक विशिष्ट प्रणाली है। विवाहपूर्व परामर्श जोड़ों के लिए अपने यौन संबंधों को बेहतर बनाने और उन्हें मज़बूत बनाने का एक मूल्यवान साधन हो सकता है। यह अक्सर एक संवेदनशील और कठिन विषय पर चर्चा करने के लिए एक संरचित, सुरक्षित और बिना किसी पूर्वाग्रह वाला वातावरण प्रदान करता है। यह किसी भी जोड़े में उत्पन्न होने वाली उन सभी विषयों पर व्यापक विश्लेषण करता है जो उनके रिश्तो में मुद्दे बनते है। यह निम्नलिखित प्रकार से जोड़े को मदद कर सकता है:

ईमानदारी पूर्वक संवाद का द्वार खोलना: जैसा कि हम जानते है कि यौन विकार और इससे होने वाली जटिलताओं के बारे में बात करना किसी भी व्यक्ति के कठिन हो सकता है। कई जोड़ों को यौन क्रिया व इसके विकार के बारे में खुलकर बात करना चुनौतीपूर्ण लग सकता है। विवाहपूर्व परामर्श बातचीत को सुगम बनाने के लिए एक पेशेवर प्रदान करके इस बाधा को दूर करता है। एक आयुर्वेदिक सेक्सोलॉजिस्ट चिकित्सक जोड़े की विभिन्न प्रकार से मदद कर सकता है:

  • एक सुरक्षित स्थान स्थापित करना: वे एक ऐसा वातावरण बनाते हैं जहाँ दोनों साथी सहज और खुद को सम्मानित महसूस करते हैं, जिससे उनमे शर्मिंदगी और आलोचना का डर कम होता है। यह एक गोपनीय और तनाव-मुक्त वातावरण होता है, जहाँ जोड़े खुद के बारे, सुनने व व्यक्त करने में सहज होता है।
  • सही भाषा का प्रयोग करना: परामर्शदाता जोड़े को उनकी इच्छाओं, चिंताओं और सीमाओं को व्यक्त करने के लिए सही शब्द खोजने में मार्गदर्शन कर सकता है, और उन्हें सिखा सकता है कि यौन क्रिया या जीवन के बारे में रचनात्मक तरीके से कैसे बात करना है जिससे की स्थिति टकरावपूर्ण तरीके से न हो।

अपेक्षाओं और इच्छाओं का तालमेल बैठाना: इसका सबसे महत्वपूर्ण लाभ यह है कि यह जोड़ों को वैवाहिक जीवन में यौन अंतरंगता के बारे में अपनी अपेक्षाओं को समझने और उनमें तालमेल बिठाने में मदद करता है। इसमें परामर्शदाता व जोड़े की बीच कई विषयों पर चर्चा शामिल हो सकती है, जैसे:

  • आवृत्ति: इस बारे में बात करना कि प्रत्येक व्यक्ति कितनी बार यौन संबंध बनाने की अपेक्षा करता है और बेमेल कामेच्छाओं से कैसे निपटा जाना चाहिए।
  • प्राथमिकताएँ और सीमाएँ: यह जानना कि प्रत्येक साथी क्या पसंद करता है और क्या नापसंद करता है, जिसमें उनके कल्पनाएँ, उत्तेजनाएँ और "प्रतिबंधित" गतिविधियाँ शामिल हैं।
  • रिश्ते में यौन क्रिया की भूमिका: इस बात पर चर्चा करना कि यौन जीवन का उनके लिए क्या अर्थ है—क्या यह शारीरिक मुक्ति, भावनात्मक जुड़ाव, प्रजनन या इन सभी के लिए है?

संभावित मुद्दों का सक्रिय रूप से समाधान करना: विवाह पूर्व परामर्श जोड़ों को समस्याओं से निपटने में पूरी तरह से मदद करता है, इससे पहले कि वे उनके निजी या वैवाहिक जीवन में संघर्ष का कारण बनें। यह निम्नलिखित मुद्दों में मदद कर सकता है:

  • पिछले अनुभव: पिछले यौन अनुभवों पर चर्चा करने के लिए एक मंच प्रदान करना, जिसमें कोई आघात या "बोझ" शामिल है, और यह कि वे वर्तमान रिश्ते को कैसे प्रभावित कर सकते हैं।
  • यौन रोग: हालाँकि विवाहपूर्व परामर्श विशेष यौन चिकित्सा का विकल्प नहीं है, फिर भी एक परामर्शदाता दम्पति को कम कामेच्छा, प्रदर्शन संबंधी चिंता या दर्द जैसी किसी भी चिंता की पहचान करने और उसका समाधान शुरू करने में मदद कर सकता है। ज़रूरत पड़ने पर परामर्शदाता किसी यौन चिकित्सक के पास भी रेफर कर सकता है।
  • भिन्न मान्यताएँ: यह दम्पतियों को यौन और अंतरंगता के बारे में अपनी सांस्कृतिक या धार्मिक मान्यताओं में अंतर को समझने में मदद कर सकता है। किसी भी व्यक्ति का पालन-पोषण उसके यौन जीवन में गहरा प्रभाव से जुड़ा होता है।

भावनात्मक और शारीरिक अंतरंगता को विकसित करना: जैसा कि हमें पता होना चाहिए कि यौन अंतरंगता भावनात्मक अंतरंगता से गहराई से जुड़ी हुई होती है। यह परामर्श दम्पतियों की मदद विभिन्न रूपों में कर सकता है:

  • अपने भावनात्मक बंधन को मज़बूत करना: अपने यौन संबंधों के बारे में बातचीत करना सीखकर, दम्पति विश्वास का निर्माण कर सकते हैं और भावनात्मक रूप से अधिक जुड़ाव महसूस कर सकते हैं, जिससे अक्सर एक अधिक संतोषजनक शारीरिक संबंध बनता है।
  • गैर-यौन अंतरंगता का अन्वेषण करना: परामर्शदाता दम्पति को शारीरिक स्नेह और अंतरंगता के अन्य रूपों को समझने और उनकी सराहना करने के लिए मार्गदर्शन कर सकते है, जो ऐसे समय में महत्वपूर्ण होते हैं जब तनाव, बीमारी या जीवन में अन्य बदलावों के कारण यौन गतिविधियाँ कम हो सकती हैं।
  • समय के साथ अंतरंगता कैसे बदलती है, इस पर चर्चा करना: यह परामर्श जोड़ों को उम्र, बच्चे होने या जीवन के अन्य चरणों के साथ आने वाले यौन संबंधों में स्वाभाविक बदलावों के लिए तैयार होने में मदद करता है। हकीकत यह है कि अंतरंगता के इस बदलाव को कुछ व्यक्ति सही तरीके से समझ भी नहीं पाते है, जो उनके रिश्तो में क्लेश का कारण बनता है।

संक्षेप में, विवाहपूर्व परामर्श खुले संवाद को प्रोत्साहित करके, अपेक्षाओं का प्रबंधन करके, तथा दीर्घकालिक साझेदारी के साथ आने वाली अपरिहार्य चुनौतियों से निपटने के लिए जोड़ों के लिए एक रूपरेखा तैयार करके स्वस्थ और संतोषजनक यौन संबंध की नींव रखता है। हालांकि कुछ व्यक्ति के लिए यह आश्चर्य वाली बात हो सकता है, परन्तु समस्त जीवन में यह जोड़े के बीच विश्वास और बंधन की नींव को मजबूत बनाने का कार्य करता है।

Dr. Sunil Dubey

आयुर्वेद विवाहपूर्व यौन परामर्श और चिकित्सा में कैसे मदद करता है?

आयुर्वेद विवाहपूर्व यौन परामर्श और चिकित्सा पर एक अनूठा और समग्र दृष्टिकोण प्रदान करता है, जो आधुनिक दृष्टिकोणों का पूरक हो सकता है। पश्चिमी चिकित्सा के विपरीत, जो अक्सर विशिष्ट विकारों पर केंद्रित होती है, आयुर्वेद यौन स्वास्थ्य को व्यक्ति के समग्र कल्याण का एक अभिन्न अंग मानता है। यह जीवन शक्ति और एक संपूर्ण अंतरंग जीवन को बढ़ावा देने के लिए शरीर, मन और आत्मा को संतुलित करने का प्रयास करता है। सबसे बड़ी बात यह है कि आयुर्वेद किसी भी व्यक्ति के शरीर और मन के संबंध को भली-भांति जानता है, साथ-ही-साथ यह आत्मा के जरूरतों से भी अवगत होता है।

यहां बताया गया है कि आयुर्वेद किस प्रकार विवाहपूर्व यौन परामर्श और चिकित्सा में योगदान दे सकता है:

ओजस और वाजीकरण की अवधारणा:

  • ओजस (जीवन शक्ति): आयुर्वेद यौन स्वास्थ्य और सहनशक्ति को व्यक्ति के ओजस का प्रत्यक्ष प्रतिबिंब मानता है, जो एक महत्वपूर्ण तत्व है जो प्रतिरक्षा, शक्ति और समग्र जीवन शक्ति प्रदान करता है। जब ओजस प्रबल होता है, तो व्यक्ति में स्वस्थ कामेच्छा, ऊर्जा और एक संपूर्ण यौन जीवन जीने की क्षमता होती है। आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से विवाह पूर्व परामर्श दोनों भागीदारों में ओजस के निर्माण और संरक्षण पर केंद्रित होता है।
  • वाजीकरण चिकित्सा: वाजीकरण आयुर्वेद में कामेच्छा, पौरुष शक्ति और प्रजनन क्षमता में सुधार के लिए समर्पित चिकित्सा का एक प्रमुख रूप है। इसका उद्देश्य व्यक्ति के यौन स्वास्थ्य और जीवन शक्ति को पुनर्स्थापित और बनाए रखना है। एक आयुर्वेदिक चिकित्सक वाजीकरण उपचारों की सलाह दे सकता है, जिसमें हर्बल उपचार, आहार परिवर्तन और जीवनशैली में बदलाव शामिल हो सकते हैं।

दोष संतुलन और व्यक्तिगत दृष्टिकोण

आयुर्वेद के तीन दोषों (त्रिदोष) सिद्धांत: आयुर्वेद मुख्य रूप से; वात, पित्त और कफ के सिद्धांत पर आधारित होता है। इसका अटूट विश्वास है कि प्रत्येक व्यक्ति में इन ऊर्जाओं का एक अनूठा संयोजन होता है, और इनके असंतुलन से कई स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं, जिनमें यौन रोग भी शामिल हैं। एक आयुर्वेदिक सेक्सोलॉजिस्ट डॉक्टर मदद करते है:

  • दोषों का आकलन करना: वह प्रत्येक साथी के प्रमुख दोष का निर्धारण करते है और उन असंतुलनों की पहचान करने में मदद करते है जो उनके यौन समस्याओं, जैसे कम कामेच्छा, शीघ्रपतन, स्तंभन दोष, या प्रदर्शन संबंधी चिंता, का कारण बन सकते हैं।
  • अनुकूलित सुझाव प्रस्तुत करना: दोषों की संरचना के आधार पर, यौन परामर्शदाता आहार, जीवनशैली और हर्बल उपचारों पर व्यक्तिगत सलाह देने में मदद करते है। उदाहरण के लिए, वात-प्रधान व्यक्ति को अपनी अनियमित ऊर्जा को नियंत्रित करने के लिए पौष्टिक खाद्य पदार्थों की आवश्यकता हो सकती है, जबकि पित्त-प्रधान व्यक्ति को अत्यधिक परिश्रम से बचने के लिए अपने उग्र स्वभाव को नियंत्रित करने की आवश्यकता हो सकती है।

Know the importance of Prematial Counseling

समग्र जीवनशैली और व्यवहार संबंधी दिशानिर्देश:

आयुर्वेद जीवन के प्रति एक समग्र दृष्टिकोण पर ज़ोर देता है जो शयनकक्ष से आगे तक फैला हुआ होता है। यह निम्नलिखित पर मार्गदर्शन प्रदान करके विवाहपूर्व परामर्श में जोड़ों की मदद कर सकता है:

  • आहार संबंधी विकल्प: कुछ खाद्य पदार्थ कामोत्तेजक (वृष्य) माने जाते हैं और प्रजनन ऊतकों को पोषण देने में मदद करते हैं। एक आयुर्वेदिक परामर्शदाता ताज़े फल, सब्ज़ियाँ, मेवे, बीज, दूध और घी से भरपूर आहार लेने की सलाह देते है, जबकि प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों और कैफीन व अल्कोहल जैसे अत्यधिक उत्तेजक पदार्थों से परहेज़ करने की सलाह।
  • तनाव प्रबंधन: जैसा कि हमें पता होना चाहिए कि पुराना तनाव यौन रोग का एक प्रमुख कारण है। आयुर्वेद में मन और शरीर को शांत करने, तनाव कम करने और समग्र जीवन शक्ति में सुधार करने के लिए योग, ध्यान और प्राणायाम (श्वास व्यायाम) जैसे अभ्यास शामिल हैं।
  • दैनिक दिनचर्या (दिनचर्या): एक स्वस्थ यौन जीवन एक अनुशासित दैनिक दिनचर्या द्वारा समर्थित होता है। इसमें नियमित नींद का समय बनाए रखना, अभ्यंग (तेल मालिश) जैसी स्व-देखभाल गतिविधियों का अभ्यास करना और अंतरंगता के लिए अनुकूल वातावरण बनाना शामिल है।
  • ऋतुएँ और चंद्र चक्र: आयुर्वेद ऊर्जा संरक्षण और स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए यौन क्रिया को ऋतुओं और चंद्र चक्रों के साथ संरेखित करने का भी मार्गदर्शन प्रदान करता है। इससे जोड़ों को यह समझने में मदद मिल सकती है कि पूरे वर्ष उनकी ऊर्जा और कामेच्छा में कैसे उतार-चढ़ाव हो सकता है।

विशिष्ट जड़ी-बूटियों और उपचारों का उपयोग:

आयुर्वेद यौन स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए विभिन्न प्रकार की जड़ी-बूटियों और उपचारों का उपयोग करता है। इन पर अक्सर एक योग्य आयुर्वेदिक व यौन चिकित्सक द्वारा परामर्श सत्र में चर्चा की जाती है और इनकी सिफ़ारिश की जाती है:

  • हर्बल उपचार: अश्वगंधा, शतावरी, सफ़ेद मूसली और गोक्षुर जैसी जड़ी-बूटियों का उपयोग आमतौर पर तनाव कम करने, कामेच्छा बढ़ाने और यौन प्रदर्शन में सुधार के लिए किया जाता है।
  • पंचकर्म: गंभीर समस्याओं के लिए, चिकित्सक पंचकर्म की सलाह दे सकते हैं, जो शरीर से विषाक्त पदार्थों को साफ़ करने और दोषों में संतुलन बहाल करने के लिए एक विषहरण चिकित्सा है।

संक्षेप में कहे तो, विवाहपूर्व यौन परामर्श में आयुर्वेद का योगदान इसके समग्र, व्यक्तिगत और निवारक दृष्टिकोण में निहित होती है। यह जोड़ों को यह समझने में मदद करता है कि एक स्वस्थ यौन संबंध केवल शारीरिक प्रदर्शन के बारे में नहीं है, बल्कि उनके समग्र शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य में गहराई से निहित होती है। आयुर्वेदिक सिद्धांतों को अपनाकर, जोड़े एक जीवंत और दीर्घकालिक अंतरंग जीवन के लिए एक मजबूत आधार तैयार कर सकते हैं। यह प्रकृति से जुड़े रहने की सलाह भी देते है जो कामुकता के इस चरण को भली-भांति प्रतिबंधित कर सके।

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डॉ. सुनील दुबे (दुबे क्लिनिक)

भारत का प्रमाणित आयुर्वेद और सेक्सोलॉजी चिकित्सा विज्ञान क्लिनिक

हेल्पलाइन या व्हाट्सएप नंबर: +91 98350-92586

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Monday, September 1, 2025

Deal with PE Best Sexologist Patna Bihar Dr Sunil Dubey

 Are you worried about your premature ejaculation during sexual intercourse? You do not have control over delaying your ejaculation during intercourse. In most of the sexual activity, you struggle with premature ejaculation and your marital life remains unbalanced due to this sexual problem. Sooner or later, you have to face problems related to your relationships due to this sexual problem.

What is premature Ejaculation?

World-renowned Ayurvedacharya Dr. Sunil Dubey, who is the best sexologist in Patna, Bihar, says that premature ejaculation is a common condition where most people face this event in their sexual life. Usually, it is not considered a sexual problem until it affects the sexual life of the man and woman.

“In the medical terminology of sexology, premature ejaculation is a common male sexual problem in which a man does not have control over his ejaculation and is not able to maintain it for a longer time with his female partner. This ejaculation occurs before the man or his partner wants during sexual activity.”

This senior sexologist further says that if it happens only occasionally then it is not a matter of concern. However, if it happens frequently and causes discomfort, frustration or a tendency to avoid sexual intimacy before penetration, then it becomes a problem in men.

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Possible common causes of premature ejaculation:

Dr. Dubey says that generally, there are biological, psychological and lifestyle factors that affect sexual health. Premature ejaculation is a sexual and psychological problem, with 90% mental health problems and 10% biological and lifestyle factors playing an important role. Till now medical science has not been able to find any exact cause of premature ejaculation, but it is believed that it involves a complex interrelationship of psychological and biological factors.

Psychological factors: Psychological factors are linked to mental health and its well-being. The brain is the primary sexual organ that responds appropriately to every sexual act. Disturbances in mental health led to many indirect problems in a person's life. Stress, anxiety, depression, relationship problems, poor body image, low self-esteem, early sexual experiences, past sexual trauma, sexual performance anxiety and hostility are factors that badly affect the mental health and sexual life of a person. It is believed that psychological health plays an important role in managing ejaculation. When mental health is disturbed, sexual hormones and doshas become unbalanced. Having good mental health is very important in dealing with the problem of premature ejaculation

Biological factors: Dr. Sunil Dubey, the best sexologist in Bihar, India says that physical health and fitness are always important to live a healthy life. Many factors are responsible for this sexual problem (early ejaculation) in men, such as abnormal hormonal levels, irregular levels of chemicals (serotonin) in the brain, inflammation or infection in the prostate or urethra, genetic predisposition, erectile dysfunction and chronic diseases.

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Types of Premature Ejaculation (PE):

Seeing the nature of premature ejaculation, it is divided into several types. The good thing about this sexual problem is that all of these are treatable and one can deal with all of them with the holistic approach of Ayurveda and naturopathy. Let us know about all these types of PE, which are listed below.

  • Lifelong Premature Ejaculation: A person experiences this from his first sexual intercourse
  • Acquired Premature Ejaculation: A person experiences it after a period of time in his sexual life
  • Natural Variable Premature Ejaculation: A person experiences it occasionally in his sexual life
  • Conditional Premature Ejaculation: A person experiences it in a specific condition or with partner

Perfect Treatment Plan for Premature Ejaculation:

Premature ejaculation is a treatable condition. Treatment often involves a combination of behavioral techniques, counseling, and medication. Dr. Sunil Dubey offers his comprehensive treatment which is clinically proven, 100% safe, natural and completely effective for every sexual patient. First of all, he helps the patients understand their underlying medical conditions that directly affect their physical health and sexual well-being. Next, he offers his medical checkup facilities which are helpful in understanding the facts of the problems. He provides sexual counseling in a comfortable and confidential environment which is helpful in understanding the psychological factors.

  • Counseling: This helps to address underlying psychological issues such as anxiety, stress, relationship problems, and past sexual trauma that may be contributing to their premature ejaculation. This counseling is based on individual or couple therapy.
  • Behavioral Therapy: This therapy is based on some specific practices in form of Start-Stop Technique, Squeeze Method, and Pelvic floor exercise. The regular practice of behavioral therapy helps to manage the early ejaculation.
  • Clinically-proven Ayurvedic Medication: Dr. Sunil Dubey provides his unique and clinically proven Ayurvedic treatment for every sexual problem. Basically, it is personalized and is safe and completely effective for sexual problems. In his treatment, he uses modern and traditional methods of Ayurveda which is a panacea for the sexual patients.
  • Holistic approach of Ayurveda: Balance diet, Seasonal fruits and vegetables, Quality Sleep, Yoga, Exercises, and Stress-management techniques.

!!!For more details, contact us at the following!!!

Dr. Sunil Dubey (Dubey Clinic)

India's Certified Ayurveda & Sexology Medical Science Clinic

!!!Helpline or WhatsApp Number: +91 98350-92586!!!

Venue: Dubey Market, Langar Toli, Chauraha, Patna-04

Clinic Timings: 8:00 AM to 8:00 PM (Daily)

Sexologist near me Libido Disorder Treatment Dr Sunil Dubey

  Some people often report that their libido has been affected and that they no longer have any desire for sexual activity. Is this a sexua...