Sunday, January 12, 2025

Best Sexologist Patna Diabetes ED Treatment | Dr. Sunil Dubey

 मेडिकल साइंस के शोध के अनुसार, टाइप 2 मधुमेह वाले करीब-करीब आधे पुरुषों में निदान के 10 वर्षों के भीतर स्तंभन दोष (नपुंसकता) विकसित हो जाने की संभावना होती है। हालाँकि, जीवनशैली में बदलाव करके स्तंभन दोष को दूर करने के कुछ तरीके हैं, जिसमें स्वस्थ आहार, नियमित व्यायाम और शराब और धूम्रपान से बचाव शामिल होता है।


यह कैसे आम है?

हालाँकि मधुमेह रोग और स्तंभन दोष (ईडी) दो अलग-अलग तरह की स्थितियाँ हैं, लेकिन वे एक-दूसरे के साथ-साथ चलते हैं। स्तंभन दोष को स्तंभन प्राप्त करने या बनाए रखने में कठिनाई के रूप में परिभाषित किया जाता है। जिन पुरुषों को मधुमेह होता है, उनमें स्तंभन दोष विकसित होने की संभावना तीन गुना से भी अधिक होती है। जब स्तंभन दोष 45 वर्ष या उससे कम आयु के पुरुषों में विकसित होता है, तो यह टाइप 2 मधुमेह का संकेत हो सकता है।


मधुमेह एक ऐसी बीमारी है जो तब होती है जब रोगी के रक्तप्रवाह में बहुत अधिक शर्करा प्रवाहित होती है। आम तौर पर, मधुमेह के दो मुख्य प्रकार होते हैं: टाइप 1 मधुमेह और टाइप 2 मधुमेह।

  • टाइप 1 मधुमेह: जो मधुमेह वाले 10% से भी कम लोगों को प्रभावित करता है।
  • टाइप 2 मधुमेह: जो मधुमेह के 90% से अधिक मामलों के लिए जिम्मेदार कारक है। यह अक्सर अधिक वजन या निष्क्रियता के परिणामस्वरूप विकसित होता है।

एक अनुमानित तौर पर यह पाया गया है कि 40 से 70 वर्ष की आयु के 10% पुरुषों में गंभीर स्तंभन दोष की समस्या होती है, और अन्य 25% में मध्यम स्तंभन दोष होते है। पुरुषों की उम्र बढ़ने के साथ-साथ उसमे स्तंभन दोष की समस्या अधिक आम हो जाता है, हालांकि यह उम्र बढ़ने का एक अनिवार्य हिस्सा नहीं है। कई पुरुषों के लिए, मधुमेह जैसी अन्य स्वास्थ्य स्थितियां इस पुरुष यौन समस्या स्तंभन दोष के विकास की संभावनाओं में योगदान करती हैं।

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विश्व प्रसिद्ध आयुर्वेदाचार्य डॉ. सुनील दुबे, जो पटना के सर्वश्रेष्ठ सेक्सोलॉजिस्ट डॉक्टरों में से एक हैं, बताते हैं कि टाइप 2 मधुमेह के रोगियों में 5-10 वर्षों के भीतर स्तंभन दोष से पीड़ित होने की सबसे अधिक संभावना होती है। जिन पुरुषों को हृदय रोग है, उनमें नपुंसकता होने की संभावना और भी अधिक बढ़ जाती है। वास्तव में, स्तंभन दोष को हृदय रोग का प्रारंभिक संकेत माना जाता है।


उन्होंने पुरुषों की गुप्त व यौन समस्याओं के पूरे स्पेक्ट्रम पर अपना शोध किया है जो शारीरिक, मनोवैज्ञानिक, चिकित्सा और अंतर्निहित स्वास्थ्य स्थितियों के कारण होते हैं। उनका सुझाव है कि यदि मधुमेह रोगी स्वस्थ जीवनशैली अपनाता है, तो वह मधुमेह के लक्षणों को कम कर सकता है और अपने यौन स्वास्थ्य को बेहतर बना सकता है। मुख्य रूप से, इस जीवनशैली में संतुलित आहार लेना और नियमित रूप से व्यायाम करना शामिल है।


मधुमेह वाले पुरुषों में इरेक्टाइल डिसफंक्शन कारणों के बारे में:

डॉ. सुनील दुबे कहते हैं कि मधुमेह और इरेक्टाइल डिसफंक्शन के बीच संबंध व्यक्ति के रक्त परिसंचरण और तंत्रिका तंत्र से जुड़ा हुआ है। मधुमेह की स्थिति में, खराब नियंत्रित रक्त शर्करा का स्तर छोटी रक्त वाहिकाओं और नसों को नुकसान पहुंचाता है। यौन उत्तेजना और प्रतिक्रिया को नियंत्रित करने वाली नसों को नुकसान पुरुष की संभोग में भाग लेने के लिए पर्याप्त कठोर इरेक्शन प्राप्त करने की क्षमता को ख़राब कर सकता है। क्षतिग्रस्त रक्त वाहिकाओं से कम रक्त प्रवाह भी मधुमेह रोगी में इरेक्टाइल डिसफंक्शन (स्तंभन दोष) में योगदान दे सकता है।

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पुरुषों में होने वाले इरेक्टाइल डिसफंक्शन के लिए कुछ सामान्य जोखिम कारक:

आम तौर पर, कई ऐसे जोखिम कारक हैं जो मधुमेह की जटिलताओं की संभावना को बढ़ा सकते हैं, जिसमें इरेक्टाइल डिसफंक्शन भी शामिल है। पुरुषों में होने वाले इरेक्टाइल डिसफंक्शन के लिए निम्नलिखित सामान्य जोखिम कारक हैं-

  • शरीर में खराब नियंत्रित रक्त शर्करा का होना।
  • तनावपूर्ण जीवनशैली, चिंता और अवसाद।
  • खराब आहार और दैनिक जीवन में निष्क्रियता।
  • मोटापा या अधिक वजन का होना।
  • शराब या धूम्रपान का अत्यधिक सेवन।
  • अनियंत्रित उच्च रक्तचाप का होना।
  • असामान्य रक्त कामेच्छा प्रोफ़ाइल।
  • ऐसी दवाएँ जो ईडी के साइड इफ़ेक्ट का कारण बनती हैं।
  • उच्च रक्तचाप, दर्द या अवसाद के लिए प्रिस्क्रिप्शन दवाएँ।


पुरुषों में होने वाले इरेक्टाइल डिसफंक्शन का निदान:

यदि आप अपने इरेक्शन की आवृत्ति या अवधि में बदलाव या कमी का अनुभव करते हैं या ऐसा नोटिस करते हैं, तो यह एक अनुभवी नैदानिक सेक्सोलॉजिस्ट डॉक्टर से परामर्श करने का सही समय है। वास्तव में, रोगी के मेडिकल इतिहास की समीक्षा करके और समस्याओं के लक्षणों तक पहुँचकर इरेक्टाइल डिसफंक्शन का निदान किया जाता है। एक अनुभवी सेक्सोलॉजिस्ट पेनिले या अंडकोष में संभावित तंत्रिका समस्याओं की पहचान करने के लिए शारीरिक जाँच करते है। यह संभव है कि रक्त और मूत्र परीक्षण मधुमेह या कम टेस्टोस्टेरोन जैसी समस्या का निदान करने में मदद कर सकते हैं।

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डॉ. सुनील दुबे जो कि बिहार के सर्वश्रेष्ठ सेक्सोलॉजिस्ट डॉक्टर है, कहते हैं कि आयुर्वेदिक दृष्टिकोण और उसका चिकित्सा उपचार की एक प्राकृतिक पद्धति है। मूल रूप से, आयुर्वेद सभी औषधियों का आधार होता है और यह संपूर्ण गुप्त व यौन समस्याओं से जड़ से मुक्ति दिलाने का कार्य करता है। आम तौर पर मधुमेह के मामले में व्यक्ति अपनी मध्यम और पुरानी इरेक्टाइल डिसफंक्शन (स्तंभन दोष) की समस्या से जूझता रहता है यहाँ आयुर्वेदिक चिकित्सा व उपचार मधुमेह और इरेक्टाइल डिसफंक्शन दोनों रोगो में सुधार करती है।


निदान के समय, यदि आपमें स्तंभन दोष के कोई लक्षण नहीं हैं, लेकिन मधुमेह या हृदय रोग का निदान किया गया है, तो आपको अपने स्वास्थ्य देखभाल पेशेवर के साथ भविष्य के निदान की संभावना पर चर्चा करनी चाहिए।


आयुर्वेद के माध्यम से स्तंभन दोष का इलाज:

यदि किसी यौन रोगी को उसके स्तंभन दोष का निदान किया जाता है; तो सबसे प्रभावी और सुरक्षित मौखिक दवा आयुर्वेदिक उपचार ही होता है। आयुर्वेदिक दवा पेनिले में रक्त के प्रवाह को बेहतर बनाने में मदद करती है और सामान्य तौर पर प्राकृतिक रूप से संपूर्ण यौन समस्याओं से पूर्णकालिक समाधान व राहत प्रदान करती है। मधुमेह की बात करें तो आयुर्वेदिक दवाएँ सुरक्षित और प्रभावी समाधान प्रदान करती हैं। वे ग्लूकोफेज (मेटफॉर्मिन) या इंसुलिन जैसी मधुमेह की दवाओं के साथ नकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं करती हैं।


मधुमेह और स्तंभन दोष के रोगियों के चिकित्सा व उपचार में, डॉ. सुनील दुबे जड़ी-बूटियों, प्राकृतिक रस-रसायनों, चिकित्सकीय रूप से सिद्ध भस्मों, प्राकृतिक गोलियों, तेलों, हर्बल उपचारों के रूप में पूरी तरह से आयुर्वेदिक दृष्टिकोण और उपचार प्रदान करते हैं। उनका कहना है कि व्यक्ति में मधुमेह एक दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्या है जो उसके जीवन भर रहती है, हालाँकि टाइप 1 और टाइप 2 दोनों मधुमेह को दवा, उचित आहार और व्यायाम के माध्यम से अच्छी तरह से नियंत्रित किया जा सकता है।


हालाँकि ईडी (स्तंभन दोष) एक स्थायी स्थिति बन सकती है, लेकिन यह आमतौर पर उन पुरुषों के लिए नहीं होता है जिन्हें कभी-कभार इरेक्शन की समस्या होती है। यदि किसी व्यक्ति को मधुमेह है, तो वह पर्याप्त नींद लेने, धूम्रपान न करने और तनाव कम करने जैसी जीवनशैली अपनाकर अपने ईडी पर काबू पा सकता है। ईडी की दवाइयाँ (आयुर्वेद) आमतौर पर अच्छी तरह से सहन की जाती हैं, और किसी भी ईडी समस्या को दूर करने में मदद करने के लिए कई वर्षों तक इस्तेमाल की जा सकती हैं।

पुरुषों इरेक्टाइल डिसफंक्शन (ईडी) रोगियों के लिए रोकथाम:

  • अपने आहार के माध्यम से अपने रक्त शर्करा को नियंत्रित करना।
  • अपने शराब के सेवन को कम करना या त्याग करना।
  • धूम्रपान बंद करना या कम-से-कम करना।
  • शारीरिक रूप से हर समय सक्रिय रहना।
  • अधिक नींद लेना या गुणवत्तापूर्ण नींद लेना।
  • अपने तनाव के स्तर को कम करना।


दुबे क्लिनिक के साथ अपॉइंटमेंट बुक करें:

यदि आप अपनी मधुमेह और इरेक्टाइल डिसफंक्शन (नपुंसकता) की समस्या से हमेशा के लिए छुटकारा पाना चाहते हैं; तो आपको दुबे क्लिनिक से एक बार अवश्य जुड़ना चाहिए। यह भारत में एक प्रमाणित व अग्रणी आयुर्वेद और सेक्सोलॉजी क्लिनिक है जो सभी प्रकार के गुप्त व यौन रोगियों को आयुर्वेद के अपने समग्र दृष्टिकोण और चिकित्सा-उपचार प्रदान करता है। डॉ. सुनील दुबे इस क्लिनिक में व्यापक आयुर्वेद दृष्टिकोण के साथ सभी प्रकार के गुप्त व यौन विकारों का इलाज करते हैं। वह इस क्लिनिक में हर दिन लगभग 35-40 गुप्त व यौन रोगियों का इलाज करते हैं। भारत के विभिन्न हिस्सों से गुप्त व यौन रोगी इस क्लिनिक से जुड़ने के लिए हर दिन दुबे क्लिनिक से संपर्क करते हैं।


अधिक जानकारी के लिए:

दुबे क्लिनिक

भारत का प्रमाणित आयुर्वेद और सेक्सोलॉजी क्लिनिक

डॉ. सुनील दुबे, गोल्ड मेडलिस्ट सेक्सोलॉजिस्ट

बी.ए.एम.एस. (रांची), एम.आर.एस.एच. (लंदन), आयुर्वेद में पीएचडी (यूएसए)

क्लिनिक का समय: 08:00 AM-08:00 PM

!!!हेल्पलाइन नंबर: +91 98350-92586!!!

वेन्यू: दुबे मार्केट, लंगर टोली, चौराहा, पटना-04

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